
देहरादून: उत्तराखंड के राज्य गीत की वर्षगांठ पर देहरादून में कांग्रेस की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने मंच से राज्य गीत की कुछ पंक्तियां गाईं, जिसके बाद पूरा गीत स्क्रीन पर प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम के दौरान राज्य गीत के सम्मान और उसकी उपेक्षा को लेकर राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश भी दिया गया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
उत्तराखंड का राज्य गीत ‘उत्तराखंड देवभूमि–मातृभूमि, शत-शत वंदन, अभिनंदन…’ लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी और अनुराधा निराला द्वारा गाया गया है। इस गीत के संगीत निर्देशक भी स्वयं नरेंद्र सिंह नेगी हैं। खास बात यह रही कि उन्होंने इस गीत के लिए किसी भी प्रकार का पारिश्रमिक नहीं लिया था और इसे अपनी मातृभूमि के प्रति सेवा बताया।
राज्य गीत को लेकर नरेंद्र सिंह नेगी की पीड़ा
कार्यक्रम में नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि यह गीत उन्होंने राज्य के लिए समर्पण भाव से बनाया था। उन्होंने किसी सरकार से कोई पारिश्रमिक नहीं लिया, क्योंकि यह उनके लिए उत्तराखंड की सेवा थी।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से इस राज्य गीत को समय के साथ हाशिये पर डाल दिया गया है, वह अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, राज्य गीत की उपेक्षा से वे व्यक्तिगत रूप से आहत हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। हालांकि कांग्रेस नेताओं ने इसे सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा विषय बताते हुए राज्य गीत को उचित सम्मान दिलाने की मांग दोहराई।
हरीश रावत का बयान
कार्यक्रम में मौजूद उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि राज्य गठन के करीब 15 साल बाद उत्तराखंड को उसकी पहचान देने वाला राज्य गीत मिला था। उन्होंने कहा कि यह गीत किसी एक सरकार का नहीं, बल्कि पूरे राज्य की साझा धरोहर है।
हरीश रावत के अनुसार, सरकार बदलने पर राज्य गीत को पृष्ठभूमि में डाल देना स्वीकार्य नहीं है, इसलिए निर्णय लिया गया है कि हर साल 6 फरवरी को इस गीत का सामूहिक रूप से गायन किया जाएगा, ताकि लोग इसे कभी न भूलें।
कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक अस्मिता, लोक चेतना और देवभूमि की आत्मा को स्वर देने वाला यह राज्य गीत आज सरकारी उपेक्षा का शिकार हो रहा है। कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, गरिमा दसौनी सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
आगे क्या होगा
कांग्रेस की ओर से ऐलान किया गया है कि अब हर वर्ष 6 फरवरी को विधिवत रूप से राज्य गीत का सामूहिक गायन किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि चाहे सरकार इस गीत को प्राथमिकता दे या नहीं, समाज के स्तर पर इसे जीवित रखने का प्रयास लगातार जारी रहेगा।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
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