
देहरादून: दून मेडिकल कॉलेज के पुरुष छात्रावास में रैगिंग के मामले में कॉलेज प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए नौ दोषी छात्रों पर कार्रवाई की है। जांच में एमबीबीएस 2025 बैच के दो छात्रों के साथ रैगिंग की पुष्टि हुई, जिसके बाद प्राचार्या डॉ. गीता जैन ने स्पष्ट किया कि संस्थान में रैगिंग को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आदेश के तहत दो मुख्य आरोपियों को अकादमिक कक्षाओं से निलंबन, भारी जुर्माना और हॉस्टल से लंबे समय के लिए निष्कासन की सजा दी गई है, जबकि अन्य सात छात्रों पर भी दंड लगाया गया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग के मामलों को लेकर हाल के वर्षों में सख्त नियम लागू किए गए हैं। इसके बावजूद समय-समय पर घटनाएं सामने आती रहती हैं। दून मेडिकल कॉलेज में सामने आया यह मामला छात्रावास की निगरानी और एंटी-रैगिंग तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता की ओर इशारा करता है।
जांच में क्या सामने आया
कॉलेज की आंतरिक जांच में पाया गया कि एमबीबीएस 2025 बैच के अयुजर अली और सक्षम आर्यन के साथ रैगिंग की गई। जांच के दौरान एमबीबीएस 2023 के मोहम्मद साकिब अली और एमबीबीएस 2024 के प्रज्ञांग पंवार को मुख्य आरोपी पाया गया।
आधिकारिक जानकारी
प्राचार्या डॉ. गीता जैन के आदेश के अनुसार दोनों मुख्य आरोपियों को दो माह के लिए अकादमिक कक्षाओं से निलंबित किया गया है। इसके साथ ही 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया और उन्हें पूरी एमबीबीएस व इंटर्नशिप अवधि के लिए हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है।
अन्य सात दोषी छात्रों—एमबीबीएस 2023 के विकल्प राणा, स्पर्श सिंह, सूर्याश शुक्ला, आदित्य पालीवाल तथा एमबीबीएस 2024 के वंश यादव, शुयेय अली और रिहान अंसारी—को हॉस्टल से तीन माह और अकादमिक कक्षाओं से एक माह के लिए निलंबित किया गया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कॉलेज से जुड़े लोगों का कहना है कि इस कार्रवाई से छात्रों में स्पष्ट संदेश गया है कि रैगिंग के मामलों में कोई रियायत नहीं दी जाएगी। अभिभावकों ने भी प्रशासन की सख्ती का स्वागत किया है।
आदेश और निगरानी व्यवस्था
प्राचार्या ने बताया कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। सभी वार्डनों और स्टाफ को छात्रावासों में निगरानी बढ़ाने और छात्रों से नियमित संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
आगे क्या होगा
कॉलेज प्रशासन एंटी-रैगिंग व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में काम करेगा। छात्रावासों में नियमित निरीक्षण और परामर्श सत्र आयोजित किए जाने की भी संभावना है।







