
देहरादून: आज से ठीक एक साल पहले 11 नवंबर 2024 की रात को हुए भीषण सड़क हादसे ने राजधानी देहरादून को हिला दिया था। तेज रफ्तार और लापरवाही के इस हादसे में छह युवाओं की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ था जो आज भी बोल नहीं पा रहा है। लेकिन इस हादसे को एक साल बीत जाने के बावजूद न तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हुई और न ही पुलिस चार्जशीट दाखिल कर पाई है।
हादसे की पृष्ठभूमि
11 और 12 नवंबर 2024 की दरमियानी रात लगभग 1:30 बजे, देहरादून के ओएनजीसी चौक के पास इनोवा कार की कंटेनर से जोरदार टक्कर हुई थी। हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार छह युवक-युवतियों की मौके पर ही मौत हो गई।
मृतकों में 20 वर्षीय कामख्या सिंघल भी शामिल थी, जबकि एकमात्र जीवित बचे सिद्धेश अग्रवाल आज भी बोलने में असमर्थ हैं।
एक साल बाद भी नहीं दाखिल हुई चार्जशीट
हादसे को एक साल गुजर जाने के बाद भी पुलिस अब तक चार्जशीट कोर्ट में दाखिल नहीं कर पाई है। इस देरी को लेकर मृतकों के परिजन सवाल उठा रहे हैं।
कामख्या सिंघल के पिता तुषार सिंघल का कहना है कि,
“हादसे में शामिल कंटेनर गाजियाबाद की एक कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड था, लेकिन उसके सारे कागज़ात 2013 में ही खत्म हो चुके थे। फिर भी उसे किसी ने नहीं रोका। न पुलिस ने, न परिवहन विभाग ने।”
कंटेनर की लापरवाही और प्रशासन की चुप्पी
जांच में सामने आया कि जिस कंटेनर से टक्कर हुई थी, उसके फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा और रजिस्ट्रेशन सब कुछ एक्सपायर हो चुके थे। इसके बावजूद वह राज्य की सीमाएं पार करके देहरादून तक पहुंच गया। न तो वाहन मालिक पर कार्रवाई हुई और न ही अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई।
जांच में देरी पर उठे सवाल
कैंट कोतवाली पुलिस के अनुसार, तकनीकी कारणों से चार्जशीट दाखिल करने में देरी हुई।
देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने कहा —
“इस मुकदमे में कुछ टेक्निकल कमियां थीं, जिन्हें अब दूर कर लिया गया है। कंटेनर के मालिक की लापरवाही भी सामने आई है। जल्द ही चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी जाएगी।”
हादसे के बाद का अभियान
एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि इस दर्दनाक हादसे के बाद शहर में ओवर स्पीड और ड्रंक एंड ड्राइव के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया।
उन्होंने कहा कि,
“अब पुलिस सख्ती से लापरवाह ड्राइविंग करने वालों पर कार्रवाई कर रही है। ऐसे मामलों में शिकंजा कसने से शहर में सड़क हादसे घटे हैं।”
पीड़ित परिवारों का दर्द
पीड़ित परिवारों का कहना है कि एक साल बाद भी उन्हें इंसाफ नहीं मिला।
कामख्या सिंघल के पिता ने कहा,
“हमने एक साल तक इंतज़ार किया कि शायद सिस्टम से कुछ उम्मीद बाकी है, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि हमारी आवाज़ें अनसुनी रह जाएंगी। हमारी बेटी के साथ-साथ छह परिवारों का भविष्य उजड़ गया।”
आगे क्या
पुलिस ने दावा किया है कि जांच प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी जाएगी। हालांकि पीड़ित परिवारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाना मुश्किल रहेगा।






