
रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 8 नवंबर को रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि में रजत जयंती समारोह मनाया गया। इस कार्यक्रम में प्रशासन ने 196 राज्य आंदोलनकारियों को आमंत्रित किया था। लेकिन समारोह के दौरान आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें केवल माला और शॉल ओढ़ाकर औपचारिक सम्मान दिया गया। साथ ही, कार्यक्रम में शहीद रायसिंह बंगारी रावत का नाम गलत लिखे जाने पर तीखी नाराजगी जताई गई।
रजत जयंती कार्यक्रम में सम्मान से ज्यादा उपेक्षा
देहरादून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के चलते जिला प्रशासन ने रुद्रप्रयाग में राज्य स्थापना दिवस से एक दिन पहले ही समारोह आयोजित किया था।
कार्यक्रम में तीन शहीद आंदोलनकारियों —
अशोक कैशिव (रामपुर तिराहा गोलीकांड),
यशोधर बेंजवाल (श्रीयंत्र टापू कांड),
और रायसिंह बंगारी रावत (मसूरी गोलीकांड) — की तस्वीरें लगाई गईं।
लेकिन शहीद रायसिंह बंगारी रावत का नाम गलती से भगवान सिंह बंगारी लिख दिया गया, जिससे राज्य आंदोलनकारियों और शहीद परिवारों में गहरा आक्रोश फैल गया।
“यह सम्मान नहीं, अपमान समारोह था” — आंदोलनकारी
कार्यक्रम में उपस्थित राज्य आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि “यह अनजाने में हुई गलती नहीं, बल्कि शहादत के प्रति लापरवाही का प्रतीक है।”
शहीद यशोधर बेंजवाल की पत्नी ने मंच से कहा —
“25 साल बीत गए, लेकिन आज भी हमारे शहीदों के नाम पर कोई स्मारक, स्मृति पट्ट या पहचान पत्र नहीं बना। नई पीढ़ी को यह तक नहीं पता कि रुद्रप्रयाग के लोगों ने राज्य निर्माण में कितनी कुर्बानियां दीं।”
राज्य आंदोलनकारी हयात सिंह राणा ने कहा —
“जब राज्य की दशा-दिशा नहीं बदली, शिक्षा और स्वास्थ्य अब भी संघर्ष का विषय हैं, तो यह कैसा सम्मान?”
चिन्हित आंदोलनकारी मानवीरेंद्र बर्त्वाल ने कहा —
“25 साल बाद भी स्थायी राजधानी, भू-कानून और मूल निवास जैसे मुद्दे अधर में हैं। सरकार ने आंदोलनकारियों की भावनाओं को कभी नहीं समझा।”
कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कहा कि “शॉल-माला पहनाकर प्रशासन ने केवल औपचारिकता निभाई।”
शहीद परिजनों को नहीं मिला मंच पर स्थान
आंदोलनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि मंच पर केवल अधिकारी और जनप्रतिनिधि बैठे, जबकि शहीदों के परिजन दर्शकों की तरह नीचे बैठाए गए। कई आंदोलनकारियों ने इसे “अपमानजनक” बताया और कहा कि सरकार केवल आयोजनों में फोटो खिंचवाने तक सीमित है, वास्तविक सम्मान की भावना नहीं है।
प्रशासन की सफाई
इस मामले में जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कहा कि कार्यक्रम में राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान पूरी श्रद्धा और मर्यादा के साथ किया गया।
“राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान में कोई कमी नहीं रखी गई है। उनकी समस्याओं के समाधान के लिए शासन से पत्राचार किया जाएगा,”
उन्होंने कहा।
स्थानीय जनता और आंदोलनकारियों की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों ने कहा कि “राज्य आंदोलनकारियों के बिना उत्तराखंड की कल्पना अधूरी है। 25 वर्ष बाद भी यदि उन्हें सम्मान की जगह उपेक्षा मिले, तो यह सरकार के लिए शर्मनाक है।”
रुद्रप्रयाग के कई युवाओं ने कहा कि “शहादत का सही सम्मान तभी होगा जब आंदोलनकारियों के नाम पर स्मारक और छात्रवृत्ति योजनाएं शुरू हों।”







