
धर्म डेस्क: Ratha Saptami 2026 हिंदू धर्म में सूर्य उपासना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इसे सूर्य जयंती और माघ सप्तमी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान सूर्य को समर्पित विशेष पूजा की जाती है, जिसका संबंध स्वास्थ्य, ऊर्जा और सकारात्मक जीवन से जोड़ा जाता है। खासतौर पर उत्तराखंड सहित देश के कई हिस्सों में इस पर्व को श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जाता है।
रथ सप्तमी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन सूर्यदेव अपने रथ पर आरूढ़ होकर उत्तरायण की दिशा में गति करते हैं। यही कारण है कि यह पर्व आध्यात्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि आप Ratha Saptami 2026 की सही तिथि, पूजा विधि और मंत्र जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए पूरी तरह उपयोगी है।
रथ सप्तमी 2026 कब है
हिंदू पंचांग के अनुसार Ratha Saptami 2026 माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाएगी। वर्ष 2026 में यह पर्व सोमवार, 23 फरवरी 2026 को पड़ेगा। इसी दिन सूर्योदय के समय स्नान, दान और सूर्य पूजा का विशेष महत्व रहेगा।
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रथ सप्तमी 2026 का शुभ मुहूर्त
रथ सप्तमी पर पूजा प्रातःकाल सूर्योदय के समय करना श्रेष्ठ माना जाता है। उस समय सूर्य को अर्घ्य देने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
| विवरण | समय / जानकारी |
|---|---|
| रथ सप्तमी तिथि | 23 फरवरी 2026, सोमवार |
| पूजा का श्रेष्ठ समय | सूर्योदय से पूर्व और सूर्योदय के समय |
| सूर्य को अर्घ्य देने का समय | प्रातःकाल स्नान के तुरंत बाद |
| विशेष कर्म | स्नान, सूर्य अर्घ्य, मंत्र जप और दान |
रथ सप्तमी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार Ratha Saptami 2026 के दिन की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को रोगों से मुक्ति, दीर्घायु और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह पर्व खासतौर पर स्वास्थ्य से जुड़ा माना जाता है। ऋषिकेश जैसे आध्यात्मिक नगर में इस दिन गंगा स्नान और सूर्य उपासना का विशेष महत्व होता है।
रथ सप्तमी 2026 की पूजा विधि
रथ सप्तमी की पूजा विधि सरल है, लेकिन इसे श्रद्धा और नियमपूर्वक किया जाना चाहिए।
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। संभव हो तो गंगा या किसी पवित्र जल से स्नान करें। इसके बाद तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और रोली डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्र का जाप करें। घर में सूर्यदेव की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाकर पूजा करें और सूर्य को प्रसाद अर्पित करें।
रथ सप्तमी पर बोले जाने वाले मंत्र
रथ सप्तमी पर सूर्य मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
ॐ सूर्याय नमः
ॐ आदित्याय नमः
इन मंत्रों का 11 या 108 बार जप करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
रथ सप्तमी 2026 में क्या करें और क्या न करें
इस दिन स्नान, दान और सूर्य उपासना करना शुभ माना जाता है। तामसिक भोजन, क्रोध और नकारात्मक व्यवहार से बचना चाहिए। सूर्य को अर्घ्य देते समय श्रद्धा और शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
Ratha Saptami 2026 केवल एक पर्व नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, ऊर्जा और आत्मिक शुद्धि का विशेष अवसर है। सही तिथि पर नियमपूर्वक सूर्य पूजा करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव देखे जा सकते हैं। यदि आप सूर्य उपासना को अपने दैनिक जीवन में महत्व देते हैं, तो रथ सप्तमी का पालन अवश्य करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
रथ सप्तमी 2026 का महत्व क्या है?
रथ सप्तमी को सूर्यदेव की विशेष पूजा का दिन माना जाता है। इस दिन सूर्य उपासना करने से स्वास्थ्य, ऊर्जा और मानसिक शांति से जुड़े लाभ मिलने की मान्यता है।
रथ सप्तमी 2026 में सूर्य को अर्घ्य कब देना सबसे अच्छा रहता है?
सूर्योदय के समय या उससे ठीक पहले सूर्य को अर्घ्य देना सबसे शुभ माना जाता है। इस समय किया गया अर्घ्य विशेष फलदायी माना जाता है।
क्या रथ सप्तमी के दिन व्रत रखना जरूरी होता है?
रथ सप्तमी पर व्रत रखना अनिवार्य नहीं है। कई लोग श्रद्धा से व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग केवल स्नान, पूजा और सूर्य अर्घ्य तक ही सीमित रहते हैं।
रथ सप्तमी पर स्नान का क्या महत्व है?
इस दिन स्नान को शरीर और मन की शुद्धि से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि स्नान के बाद सूर्य पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
क्या घर पर रहकर भी रथ सप्तमी की पूजा की जा सकती है?
हाँ, रथ सप्तमी की पूजा घर पर भी की जा सकती है। साफ-सफाई के साथ स्नान करके सूर्य को जल अर्पित करना और मंत्र जप करना पर्याप्त माना जाता है।
रथ सप्तमी पर कौन-सा मंत्र बोलना सरल और प्रभावी होता है?
इस दिन “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप सरल भी है और प्रभावी भी माना जाता है। इसे श्रद्धा के साथ बोलना सबसे महत्वपूर्ण है।







