
देहरादून: डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे ही एक प्रकरण में उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि ऑनलाइन लेनदेन में हुई धोखाधड़ी ग्राहक की अपनी लापरवाही का परिणाम है, तो इसके लिए बैंक या डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। आयोग ने इस मामले में पंजाब नेशनल बैंक और Google Pay को राहत देते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश को रद्द कर दिया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह मामला हरिद्वार निवासी सचिन कुमार से जुड़ा है। उनके अनुसार, नवंबर 2020 में उन्होंने Google Pay के माध्यम से 25 हजार रुपये ट्रांसफर करने का प्रयास किया, जो असफल बताया गया, लेकिन राशि खाते से कट गई। इसके बाद संदिग्ध संदेश मिलने लगे और अगले दो दिनों में उनके खाते से कई बार रकम डेबिट हुई। कुल मिलाकर 1 लाख 6 हजार 500 रुपये खाते से निकल गए।
पीड़ित ने बैंक में शिकायत की और समाधान न मिलने पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का रुख किया, जहां बैंक को दोषी ठहराते हुए रकम लौटाने का आदेश दिया गया था।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
जिला आयोग के आदेश के खिलाफ बैंक ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि सभी लेनदेन ग्राहक के अपने मोबाइल फोन से ही किए गए थे।
राज्य उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में कहा कि मोबाइल फोन, ओटीपी, पासवर्ड और यूपीआई पिन की सुरक्षा पूरी तरह उपभोक्ता की जिम्मेदारी होती है। यदि इन जानकारियों की सुरक्षा में चूक होती है, तो बैंक या डिजिटल ऐप को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि Google Pay जैसे प्लेटफॉर्म पर बिना सही यूपीआई पिन डाले कोई भी लेनदेन संभव नहीं है, इसलिए यह माना जाएगा कि ट्रांजेक्शन ग्राहक की जानकारी में हुए। इसी आधार पर जिला आयोग का आदेश रद्द कर दिया गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
डिजिटल लेनदेन करने वाले उपभोक्ताओं का कहना है कि इस फैसले से उन्हें सतर्क रहने का स्पष्ट संदेश मिला है। लोगों ने माना कि तकनीक सुरक्षित है, लेकिन सावधानी बरतना उपयोगकर्ता की जिम्मेदारी है।
आंकड़े और तथ्य
मामले में कुल 1,06,500 रुपये की राशि डेबिट होने का दावा किया गया था। आयोग की सुनवाई में यह तथ्य निर्णायक रहा कि सभी ट्रांजेक्शन ग्राहक के डिवाइस से ही किए गए।
आगे क्या होगा
इस फैसले के बाद डिजिटल लेनदेन से जुड़े मामलों में उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी को लेकर एक स्पष्ट मिसाल सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगे ऐसे मामलों में ओटीपी और यूपीआई पिन की गोपनीयता को केंद्रीय बिंदु माना जाएगा।
पंजाब नेशनल बैंक देहरादून के जोनल अधिकारी अनुपम ने कहा कि यह फैसला डिजिटल लेनदेन करने वाले उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संदेश है। उन्होंने कहा कि तकनीक सुरक्षित है, लेकिन उसका सही और सतर्क इस्तेमाल जरूरी है।
बैंक ने यह भी कहा कि डिजिटल इंडिया के दौर में ऑनलाइन भुगतान आम हो चुका है और ग्राहक अपनी जानकारी किसी तीसरे पक्ष से साझा न करें।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
यदि आपके क्षेत्र में कोई घटना, समस्या या जानकारी हो तो हमें ईमेल या फोटो/वीडियो भेजें —
📩 rishikeshnews.com@gmail.com





