
हरिद्वार में चंडीदेवी मंदिर परमार्थ ट्रस्ट के पूर्व मुख्य ट्रस्टी महंत रोहित गिरी ने अपनी पूर्व पत्नी, पुत्र और सहयोगियों पर ट्रस्ट की संपत्ति हड़पने और जाली हस्ताक्षर के आधार पर ट्रस्ट का अवैध नवीनीकरण कराने का आरोप लगाया है। कोर्ट के आदेश पर श्यामपुर पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
चंडीदेवी मंदिर परमार्थ ट्रस्ट हरिद्वार का प्रमुख धार्मिक ट्रस्ट है, जहां लंबे समय से प्रबंधन से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं। इस बार मामला पूर्व मुख्य ट्रस्टी महंत रोहित गिरी द्वारा गंभीर आरोप लगाने के बाद और अधिक गहराता नजर आ रहा है। आरोपों में जाली हस्ताक्षर, अवैध नवीनीकरण और ट्रस्ट संपत्ति के दुरुपयोग तक शामिल हैं।
आधिकारिक जानकारी
महंत रोहित गिरी ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देते हुए बताया कि वे चंडीदेवी मंदिर के मुख्य ट्रस्टी और एकमात्र सेवायत हैं। उनका आरोप है कि उनकी पूर्व पत्नी गीतांजलि, पुत्र भवानी नंदन गिरी सहित आठ लोगों ने साजिश के तहत उनका जाली इस्तीफा तैयार किया और उसी के आधार पर ट्रस्ट का नवीनीकरण करा लिया।
श्यामपुर थाना प्रभारी मनोज शर्मा ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी साक्ष्यों की पड़ताल कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह विवाद लंबे समय से चर्चा में है और अब मामला पुलिस व न्यायालय तक पहुंचने से स्थिति और जटिल हो गई है। कुछ श्रद्धालुओं ने कहा कि प्रबंधन विवादों का असर मंदिर की व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सेवाओं पर नहीं पड़ना चाहिए।
विशेषज्ञ टिप्पणी
धार्मिक ट्रस्ट प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जाली हस्ताक्षर और अवैध नवीनीकरण जैसे आरोप गंभीर हैं और इनके साबित होने पर कानूनी कार्रवाई अनिवार्य रूप से संभव है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता बनाए रखना सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण पक्ष है।
आरोपों का विवरण
महंत रोहित गिरी का कहना है कि 14 मई 2025 को पंजाब पुलिस की मदद से उन्हें घर से गिरफ्तार करवाया गया। आरोप है कि जेल में रहते हुए उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी हुई।
उन्होंने बताया कि आरोपियों ने 13 मई का जाली इस्तीफा तैयार कर उनके नकली हस्ताक्षर बनाए और उसे ट्रस्ट में पेश कर दिया।
इसी आधार पर 27 मई को तहसील ऋषिकेश में ट्रस्ट का नया नवीनीकरण करवाया गया, जिसमें उनके पुत्र भवानी नंदन को मुख्य ट्रस्टी दिखाया गया।
इसके बाद ट्रस्ट की संपत्ति, बैंक खातों और चढ़ावे की राशि का दुरुपयोग होने का भी आरोप लगाया गया है।
अन्य आरोप
महंत रोहित गिरी ने यह भी दावा किया कि उनकी अनुपस्थिति में उनकी स्कॉर्पियो कार को गीतांजलि, आकाश और कुसुम बच्छेती उठाकर ले गए। उन्हें आशंका है कि वाहन का उपयोग किसी असामाजिक गतिविधि में भी किया गया होगा।
उन्होंने बताया कि जेल से 8 जुलाई को श्यामपुर थाना और एसएसपी कार्यालय में तहरीर भेजी गई, लेकिन कार्रवाई न होने के कारण उन्हें कोर्ट का सहारा लेना पड़ा।
आगे क्या
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए दस्तावेज़ों, नवीनीकरण प्रक्रिया और आरोपियों की भूमिका की विस्तृत जांच की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।





