
घनसाली (टिहरी गढ़वाल): भिलंग क्षेत्र की ग्रामसभा समणगांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां नेपाली मूल के लोगों पर अवैध कच्ची शराब के कारोबार का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि गांव के छापराधार तोक में यह गोरखधंधा पिछले छह महीनों से चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले पुलिस ने यहां से 70–80 लीटर अवैध शराब बरामद कर दो लोगों को जेल भेजा था, लेकिन अब वही कारोबार दोबारा शुरू हो गया है।
छापराधार तोक में फिर से शुरू हुआ अवैध कारोबार
ग्रामीणों के अनुसार, समणगांव के छापराधार तोक क्षेत्र में कच्ची शराब का निर्माण और बिक्री खुलेआम की जा रही है। नेपाली मूल के कुछ लोग यहां अवैध तरीके से शराब बनाकर बेच रहे हैं, जिससे पूरे गांव की छवि खराब हो रही है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि यह कारोबार लगातार छह महीनों से चल रहा है, लेकिन पुलिस और आबकारी विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई, फिर दोबारा सक्रिय गिरोह
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ महीने पहले पुलिस ने यहां छापा मारकर लगभग 70–80 लीटर अवैध शराब बरामद की थी।
उस समय दो आरोपियों को जेल भेजा गया था, लेकिन अब वही नेटवर्क फिर से सक्रिय हो गया है।
ग्रामीण हल्दीराम ने बताया —
“हमने कई बार स्थानीय पुलिस चौकी और आबकारी विभाग को इसकी जानकारी दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा शराब बेचने वाले अब लोगों को धमकाने लगे हैं।”
गांव की छवि पर पड़ रहा असर
ग्रामीणों ने बताया कि समणगांव अब “अवैध शराब के गांव” के रूप में बदनाम हो रहा है।
“पहले यह इलाका खेती और मेहनतकश लोगों के लिए जाना जाता था, लेकिन अब कुछ बाहरी लोगों ने यहां शराब बनाकर पूरे गांव को बदनाम कर दिया है,” मालती देवी!
गांव के युवाओं का कहना है कि प्रशासन को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, नहीं तो अपराध और नशे की प्रवृत्ति बढ़ती जाएगी।
पुलिस और आबकारी विभाग पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस और आबकारी विभाग दोनों ही इस पूरे मामले में निष्क्रिय बने हुए हैं।
“जब पहले गिरफ्तारी हुई थी, तो उम्मीद जगी थी कि गांव से यह गोरखधंधा खत्म होगा, लेकिन अब वही लोग फिर से शराब बेच रहे हैं,” – संतोष
लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विभागीय अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे आरोपियों के हौसले बुलंद हैं।
ग्रामीणों की मांग — सख्त कार्रवाई और निगरानी बढ़ाई जाए
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में त्वरित कार्रवाई की जाए और छापामारी बढ़ाई जाए। साथ ही, गांव में नशा उन्मूलन समिति बनाकर स्थायी निगरानी प्रणाली स्थापित करने की बात कही है।
स्थानीय आवाजें
“हमारे गांव की पहचान मेहनत और ईमानदारी की थी, अब लोग इसे शराब के गांव के रूप में जानते हैं। यह शर्म की बात है।”
— नीलम बिष्ट
“नेपाली मूल के कुछ लोग यहां बस गए हैं और अवैध शराब बनाकर बेच रहे हैं। पुलिस को रोज गश्त करनी चाहिए।”
— मनोहर सिंह






