
देहरादून। देहरादून जिला पंचायत अब लावारिस और पालतू कुत्तों के नियंत्रण को लेकर एक ठोस नीति बनाने जा रही है। बुधवार को प्रस्तावित बोर्ड बैठक में इस मुद्दे पर औपचारिक रूप से चर्चा की जाएगी, जहां कुत्तों के बधियाकरण (Sterilization) और टीकाकरण (Vaccination) से जुड़ी नीति के निर्माण पर फैसला लिया जाएगा। अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो देहरादून राज्य का पहला ऐसा जिला पंचायत बन जाएगा जो आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए स्वतंत्र नीति लागू करेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ रही है कुत्तों की दहशत
अब तक कुत्तों से जुड़ी घटनाओं को केवल शहरी समस्या माना जाता था, लेकिन अब ग्राम्य इलाकों में भी यह एक बड़ी चिंता बन चुकी है। हाल ही में बिधोली आमवाला ओखल गांव में एक पालतू रॉटविलर द्वारा महिला पर हमला करने की घटना ने पंचायत स्तर पर कुत्तों के नियंत्रण की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है। चूंकि यह इलाका नगर निगम सीमा से बाहर था, इसलिए निगम की टीम के पास कोई कार्रवाई का अधिकार नहीं था। परिणामस्वरूप, ग्राम पंचायतों को इस तरह की घटनाओं में केवल पुलिस या स्थानीय स्तर पर ही सीमित कार्रवाई करनी पड़ती है।
नगर निगम के पास पहले से हैं अधिकार
वर्तमान में नगर निगमों के पास कुत्तों के पंजीकरण, बधियाकरण और जुर्माना लगाने जैसे अधिकार हैं। निगम की नीति के अनुसार, बिना पंजीकरण या पट्टे के कुत्ते को खुले में छोड़ने पर जुर्माना लगाया जा सकता है। देहरादून नगर निगम ने हाल ही में अपनी बोर्ड बैठक में पालतू कुत्तों के पंजीकरण शुल्क और जुर्माने की राशि में बढ़ोतरी की है, ताकि शहरी क्षेत्रों में नियंत्रण को और प्रभावी बनाया जा सके।
आय बढ़ाने के लिए नई परियोजनाओं पर भी जोर
जिला पंचायत ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का लगभग ₹61.72 करोड़ का बजट पहले ही पारित कर दिया है। अब लक्ष्य आय के नए स्रोत विकसित करने का है। इसके तहत रायपुर चौक, नत्थनपुर चौक और माजरा जैसी प्रमुख जगहों पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और वेडिंग प्वाइंट बनाने के प्रस्ताव रखे जाएंगे। इसके अलावा, ऋषिकेश-श्यामपुर बाईपास स्थित लगभग चार बीघा भूमि पर होटल या अन्य व्यावसायिक भवन बनाने की भी योजना है। कुल मिलाकर लगभग ₹15 करोड़ की परियोजनाओं पर चर्चा की जाएगी।







