
देहरादून: लंबे समय से चर्चा में चल रही आढ़त बाजार शिफ्टिंग प्रक्रिया अब गति पकड़ चुकी है। सोमवार को पुराने आढ़त बाजार की दो संपत्तियों की रजिस्ट्री लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) के पक्ष में कराई गई। इसके बदले में व्यापारियों को ₹5 करोड़ रुपये का मुआवजा चेक के माध्यम से प्रदान किया गया है। एमडीडीए और लोनिवि की संयुक्त पहल से यह परियोजना अब सार्वजनिक हित के महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुकी है।
80 संपत्तियों की रजिस्ट्री प्रक्रिया जारी
सूत्रों के अनुसार, आढ़त बाजार शिफ्टिंग प्रक्रिया में कुल 80 संपत्तियों की रजिस्ट्री होनी है। सोमवार को इनमें से पहली दो रजिस्ट्री पूरी कर ली गई हैं। शेष संपत्तियों की रजिस्ट्री चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। एमडीडीए ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी भुगतानों को चेक के माध्यम से ट्रांसफर करने का निर्णय लिया है।
एमडीडीए ने लोनिवि को ₹20 लाख जारी किए
मौजूदा स्थिति के अनुसार, प्रत्येक संपत्ति की रजिस्ट्री पर ₹25,000 शुल्क तय किया गया है। इस हिसाब से कुल 80 रजिस्ट्री के लिए ₹20 लाख रुपये एमडीडीए (मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण) द्वारा लोक निर्माण विभाग (PWD) को ट्रांसफर कर दिए गए हैं।
“हमारा प्रयास है कि आढ़त बाजार शिफ्टिंग और सड़क चौड़ीकरण जैसे सार्वजनिक कार्यों में किसी को असुविधा न हो। प्रभावित व्यापारियों को पूरी पारदर्शिता के साथ मुआवजा और भूखंड आवंटन दिया जा रहा है।” — बंशीधर तिवारी, उपाध्यक्ष, एमडीडीए
शहर के लिए अहम है आढ़त बाजार-तहसील चौक चौड़ीकरण परियोजना
आढ़त बाजार से तहसील चौक तक सड़क चौड़ीकरण देहरादून के सबसे महत्वपूर्ण विकास प्रोजेक्ट्स में से एक है। इस परियोजना से न केवल शहर के यातायात दबाव में कमी आएगी, बल्कि बाजार क्षेत्र की सुंदरता और आर्थिक गतिविधियों में भी सुधार होगा। शहर के व्यापारी और स्थानीय लोग इस परियोजना को लेकर उत्साहित हैं।
व्यापारियों को समय पर मुआवजा
एमडीडीए ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित संपत्तिधारकों को समय पर और उचित मुआवजा दिया जा रहा है। मुआवजे की राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) प्रणाली के तहत उनके खातों में ट्रांसफर की जा रही है। इससे किसी भी प्रकार की देरी या विवाद की संभावना नहीं रहेगी।
जनहित और विकास का संतुलन
एमडीडीए का कहना है कि शहर के विकास कार्यों के साथ-साथ नागरिकों की सहूलियत पर भी समान ध्यान दिया जा रहा है। शहर में चल रहे सड़क चौड़ीकरण और पुनर्वास कार्यों से देहरादून की सूरत बदलने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
एक व्यापारी ने बताया —
“हमारी संपत्तियों की रजिस्ट्री पूरी हो गई है और मुआवजा भी समय पर मिला। प्रशासन ने पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई है, जिससे हम संतुष्ट हैं।”





