
पौड़ी गढ़वाल में मानव–वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती आशंकाओं को देखते हुए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने दिसंबर माह के लिए सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन समय में अस्थायी बदलाव किया है। आदेश के अनुसार, अब कोई भी संस्था सुबह 09:15 बजे से पहले और शाम 03:00 बजे के बाद संचालित नहीं होगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पौड़ी गढ़वाल जिले में हाल के दिनों में वन्यजीव सक्रियता में तेजी देखी गई है। गुलदार, भालू और अन्य जंगली जानवरों की दिन और शाम के समय बढ़ती आवाजाही से स्कूल जाने वाले बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ गई थीं।
गढ़वाल वन प्रभाग ने प्रशासन को अवगत कराया कि कई शिक्षा संस्थानों के मार्ग वन क्षेत्र से होकर गुजरते हैं, जिससे संघर्ष का जोखिम बढ़ जाता है।
आधिकारिक जानकारी
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने गढ़वाल वन प्रभाग की रिपोर्ट के आधार पर आपदा प्रबंधन अधिनियम–2005 की धारा 34(ड) का प्रयोग करते हुए आदेश जारी किया है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि:
- जनपद के सभी सरकारी, अर्द्ध–सरकारी, निजी विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र सुबह 09:15 बजे से पहले संचालित नहीं होंगे।
- दोपहर 03:00 बजे के बाद किसी भी प्रकार की शैक्षिक गतिविधि नहीं चलेगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
अभिभावकों ने इस निर्णय को बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से सही बताया है। उनका कहना है कि कई क्षेत्रों में जंगली जानवरों की सक्रियता बढ़ने से सुबह जल्दी और देर शाम आवागमन जोखिम भरा हो गया था।
कुछ शिक्षकों का कहना है कि समय में बदलाव से शीतकालीन सत्र के अनुरूप संचालन अधिक सुरक्षित रहेगा।
विशेषज्ञ टिप्पणी
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों में दिन छोटा होने और जंगलों में भोजन की कमी के कारण वन्यजीव मानव बस्तियों की ओर अधिक आते हैं। स्कूल समय में परिवर्तन संघर्ष की संभावना कम करने का प्रभावी कदम है।
आगे क्या
डीएम ने मुख्य शिक्षा अधिकारी और जिला कार्यक्रम/बाल विकास अधिकारी को आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि किसी भी संस्था में उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।





