
देहरादून। दिल्ली में 10 नवंबर को लालकिले के पास हुए कार धमाके की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ा इनपुट मिला है। मुख्य हमलावर डॉ. उमर नबी की कॉल डिटेल में उत्तराखंड का संबंध सामने आया है। प्रारंभिक जांच में देहरादून के एक चिकित्सक और पिथौरागढ़ की रहने वाली एक महिला का संपर्क होने की पुष्टि हुई है। हालांकि इंटेलीजेंस और एसटीएफ की पूछताछ में पता चला कि दोनों उससे काफी समय पहले संपर्क में थे और वर्तमान में राज्य में नहीं रह रहे हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
लालकिले के पास हुआ धमाका राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। प्रारंभिक जांच के आधार पर सुरक्षा एजेंसियां इस घटना को सुनियोजित साजिश मान रही हैं। इसी क्रम में जब मुख्य आरोपित डॉ. उमर नबी की डिजिटल और कॉल रिकॉर्डिंग खंगाली गई तो कई राज्यों में खोजबीन तेज हुई, जिनमें उत्तराखंड का नाम भी सामने आया।
आधिकारिक जानकारी
सूत्रों के अनुसार, यूपी एटीएस ने उत्तराखंड पुलिस को जानकारी दी कि कॉल डिटेल में दो नंबर उत्तराखंड से जुड़े थे—एक देहरादून के चिकित्सक का और दूसरा पिथौरागढ़ निवासी महिला का।
इसके बाद उत्तराखंड एसटीएफ और इंटेलीजेंस की संयुक्त टीमें त्वरित कार्रवाई में जुटीं। चिकित्सक के देहरादून स्थित घर पर पूछताछ की गई, लेकिन परिवार ने बताया कि वह स्थायी रूप से फरीदाबाद शिफ्ट हो चुके हैं। फरीदाबाद जाकर भी टीम को यही जानकारी मिली कि चिकित्सक लगभग दो वर्ष पहले वहां आ गए थे और उनका नबी से अब कोई संपर्क नहीं है।
इसी तरह पिथौरागढ़ की महिला की जांच में पता चला कि वह एक प्लेसमेंट कंपनी में कार्यरत थी। एक कंपनी को डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता थी, जिसके लिए उसने नौकरी के संबंध में उमर नबी को मेल भेजा था। जवाब न मिलने पर उसने फोन भी किया था, लेकिन संपर्क आगे नहीं बढ़ा। महिला वर्तमान में नोएडा में कार्यरत है।
अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने बताया कि मामले के बाद उत्तराखंड पुलिस हाई अलर्ट पर है और लगातार चेकिंग अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी भी संदिग्ध गतिविधि का सीधा लिंक नहीं मिला है, लेकिन किसी भी इनपुट पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
देहरादून और पिथौरागढ़ के स्थानीय लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी किसी भी जांच में राज्य का नाम आने से स्थिति गंभीर हो जाती है। कई लोगों ने कहा कि पुलिस और इंटेलीजेंस की त्वरित कार्रवाई से स्पष्ट है कि राज्य किसी भी संभावित खतरे को हल्के में नहीं ले रहा।
विशेषज्ञ टिप्पणी
एक सुरक्षा विशेषज्ञ ने बताया कि “किसी भी बड़े आतंकी मामले की जांच में विभिन्न राज्यों का डेटा सामने आना सामान्य बात है। महत्वपूर्ण यह है कि स्थानीय एजेंसियां समय पर सत्यापन कर गलतफहमियों को दूर करें।”
आगे क्या
सुरक्षा एजेंसियां डिजिटल डेटा और संदिग्ध संपर्कों की दोबारा जांच कर रही हैं। दिल्ली धमाके की मुख्य जांच केंद्रीय एजेंसियों के पास है, जबकि उत्तराखंड में एसटीएफ और इंटेलीजेंस केवल उन इनपुट्स का सत्यापन कर रही हैं जो राज्य से जुड़े हैं। आने वाले दिनों में दिल्ली से प्राप्त नए इनपुट के आधार पर और कार्रवाई संभव है।






