
उत्तरकाशी: जहां एक ओर पहाड़ के सरकारी स्कूल बच्चों की कमी के चलते बंद होने की कगार पर हैं, वहीं पुरोला ब्लॉक का छोटा सा गांव उदकोटी आज शिक्षा की नई मिसाल बनकर उभरा है। राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय उदकोटी न केवल क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ विद्यालय बन चुका है, बल्कि यह अब अभिभावकों की पहली पसंद भी है।
विद्यार्थियों की संख्या और सफलता ने रचा इतिहास
पुरोला ब्लॉक के इस विद्यालय में वर्तमान में 72 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं — जो ब्लॉक के किसी भी सरकारी प्राथमिक विद्यालय से सबसे अधिक संख्या है। यहां के विद्यार्थी हर वर्ष सैनिक स्कूल और राजीव नवोदय विद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर विद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं।
विद्यालय की उपलब्धियां सुनकर जब लंदन के व्यवसायी और समाजसेवी राज भट्ट तक इसकी जानकारी पहुँची, तो वे स्वयं उदकोटी पहुंचे। विद्यालय की अनुशासनप्रियता, स्वच्छ वातावरण और विद्यार्थियों के उत्साह को देखकर वे प्रभावित हुए और उन्होंने विद्यालय की मदद के लिए हाथ बढ़ाया।
समाजसेवी ने की मदद, शिक्षण संसाधन हुए मजबूत
राज भट्ट ने विद्यालय को एक अतिरिक्त शिक्षक, एक नया कक्षा-कक्ष, कंप्यूटर और शैक्षणिक सामग्री प्रदान की। इससे विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था और आधुनिक संसाधनों में बड़ा सुधार हुआ।
प्रधानाध्यापक की मेहनत से बदली तस्वीर
विद्यालय की सफलता के पीछे सबसे बड़ा श्रेय जाता है प्रधानाध्यापक पृथ्वी सिंह रावत को। वर्ष 2016 में जब उनका स्थानांतरण यहां हुआ, तब विद्यालय की स्थिति बेहद खराब थी — न चारदीवारी थी, न साफ-सफाई। पशु खुलेआम स्कूल परिसर में घूमते थे।
पृथ्वी सिंह रावत ने स्वयं के संसाधनों से चारदीवारी निर्माण और मरम्मत कार्य करवाया। इसके बाद उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता, अनुशासन और बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित किया। उनकी मेहनत से न केवल विद्यालय की व्यवस्था सुधरी, बल्कि छात्र संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई।
समर्पित टीम और अनुशासित माहौल
आज विद्यालय में पांच सरकारी शिक्षक कार्यरत हैं, और एक शिक्षक लंदन के समाजसेवी राज भट्ट द्वारा स्थानीय युवक को नियुक्त किया गया है। यह शिक्षक बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ खेल, संस्कृति और अनुशासन की भी शिक्षा दे रहे हैं।
विद्यालय को अब तक कई बार ब्लॉक और जिला स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। जहां एक ओर कई सरकारी स्कूल बंदी की कगार पर हैं, वहीं उदकोटी का यह विद्यालय यह साबित कर रहा है कि यदि शिक्षक समर्पित हों तो सरकारी स्कूल भी निजी विद्यालयों को पीछे छोड़ सकते हैं।
स्थानीय भागीदारी से मजबूत हुआ विद्यालय
प्रधानाध्यापक पृथ्वी सिंह रावत ने बताया कि विद्यालय में शिक्षक-अभिभावक संघ की बैठक में एक नई समूहिक विज्ञप्ति निकाली गई थी, जिसमें गांव के तीन युवाओं ने आवेदन किया था। इनमें से एक युवक को विद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है, जो बच्चों की शिक्षा में समर्पण के साथ योगदान दे रहा है।







