
नैनीताल: अमेरिका में नौकरी दिलाने के नाम पर 11.50 लाख रुपये की कथित ठगी के मामले में आरोपी को फिलहाल हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। इस मामले में दायर अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकलपीठ ने राज्य सरकार से आपत्ति दाखिल करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल आरोपी को संरक्षण नहीं दिया जा सकता। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई 10 फरवरी को निर्धारित की गई है। यह मामला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें लंबे समय तक चल रही धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज और पुलिस कार्रवाई में देरी जैसे गंभीर आरोप जुड़े हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
मामले की शिकायत हल्द्वानी निवासी पूरन चंद्र पांडेय ने उधम सिंह नगर जिले के जसपुर थाने में दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार जसपुर निवासी सुधीर कुमार ने वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान अमेरिका में नौकरी दिलाने का झांसा दिया। इस दौरान अलग-अलग किस्तों में 11 लाख रुपये लिए गए। जब लंबे समय तक वीजा नहीं मिला तो शिकायतकर्ता ने दबाव बनाया। इसके बाद वर्ष 2022 में आरोपी ने वीजा बनने का दावा करते हुए 50 हजार रुपये और मांगे। बावजूद इसके वीजा नहीं मिला।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देने पर वर्ष 2025 में आरोपी की ओर से फर्जी अमेरिकी वीजा उपलब्ध कराया गया, जिसकी जारी होने की तारीख 23 अगस्त 2025 दर्शाई गई थी। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उस तारीख को अमेरिका से ऐसा कोई वीजा जारी ही नहीं हुआ था।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
मामले की सुनवाई उत्तराखंड हाईकोर्ट में अवकाशकालीन न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की एकलपीठ के समक्ष हुई। अदालत ने राज्य सरकार से आपत्ति प्रस्तुत करने को कहा है और अगली सुनवाई की तारीख तय की है। पुलिस स्तर पर पहले शिकायत पर कार्रवाई न होने के आरोप भी सामने आए हैं, हालांकि उच्च अधिकारियों से संपर्क के बाद मुकदमा दर्ज किया गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के ऐसे मामले क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे हैं। लोगों ने मांग की कि ऐसे मामलों में समय पर पुलिस कार्रवाई हो, ताकि पीड़ितों को लंबा इंतजार न करना पड़े।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट में 10 फरवरी को राज्य सरकार की आपत्ति के बाद अग्रिम जमानत याचिका पर आगे सुनवाई होगी। इसके बाद ही यह तय होगा कि आरोपी को किसी तरह की राहत मिलती है या नहीं।
अन्य मामलों में भी हाईकोर्ट के आदेश
इसी दौरान हाईकोर्ट ने काशीपुर की निचली अदालत में दो पक्षों के बीच चल रहे एक आपराधिक वाद में आपसी समझौते के आधार पर पूरी कार्यवाही को निरस्त कर दिया। अदालत के इस फैसले से लंबे समय से चले आ रहे विवाद का अंत हुआ है।
वहीं, दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक अन्य मामले में हल्द्वानी की निचली अदालत में विचाराधीन कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से इसे वैवाहिक कलह से जुड़ा मामला बताते हुए अनावश्यक आपराधिक रूप देने का दावा किया गया है।
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