
देहरादून: उत्तराखंड में पंचायत व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार जल्द एक बड़ा निर्णय ले सकती है। पंचायत भवन निर्माण के लिए बढ़े हुए बजट की लंबे समय से महसूस की जा रही जरूरत को देखते हुए सरकार अब राज्य स्तर से दी जाने वाली धनराशि को दोगुना करने की तैयारी में है। इस संबंध में निदेशालय स्तर से प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है, हालांकि अंतिम मंजूरी अभी लंबित है। यदि प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है, तो वर्षों से पंचायत भवन के इंतजार में बैठी सैकड़ों ग्राम पंचायतों को राहत मिलने की उम्मीद है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे हो जाने के बावजूद उत्तराखंड की बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों के पास आज भी अपना पंचायत भवन नहीं है। पंचायतों को लोकतंत्र की सबसे निचली और मजबूत इकाई माना जाता है, लेकिन बुनियादी ढांचे के अभाव में ग्राम सभाओं और प्रशासनिक कार्यों के संचालन में लगातार समस्याएं सामने आती रही हैं।
आधिकारिक जानकारी
पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पंचायत भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। वर्तमान में केंद्र सरकार की ओर से प्रति पंचायत 20 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जाती है, जबकि राज्य सेक्टर से अब तक 10 लाख रुपये का ही प्रावधान था। प्रस्ताव के तहत राज्य की ओर से दी जाने वाली राशि को बढ़ाकर 20 लाख रुपये किए जाने की योजना है, जिससे कुल बजट में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन न होने से बैठकों और योजनाओं के क्रियान्वयन में कठिनाई होती है। कई जगहों पर पंचायतों को किराए के कमरों या स्कूल भवनों में काम चलाना पड़ता है, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता है।
आंकड़े / तथ्य
आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में 1300 से अधिक ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से 803 पंचायतों में अब तक पंचायत भवन का निर्माण नहीं हो पाया है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूमि की कमी, अधिक निर्माण लागत और भूमि विवाद इसके प्रमुख कारण रहे हैं। कई जिलों से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट भी मंगाई गई है।
आगे क्या होगा
यदि प्रस्ताव को वित्त विभाग की मंजूरी मिल जाती है, तो पंचायत भवन निर्माण की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंच सकेगा। पंचायती राज विभाग के विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते के अनुसार, यह कदम पंचायतों को मजबूत करने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।






