
देहरादून: उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती के अवसर पर शनिवार को पुलिस लाइन देहरादून में राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आंदोलन के 13 बलिदानी आंदोलनकारियों के परिजनों को सम्मानित किया और आंदोलनकारियों की पेंशन एवं सहायता राशि में बढ़ोतरी की कई घोषणाएँ कीं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
साल 2000 में राज्य निर्माण की मांग को लेकर चले लंबे जनांदोलन में हजारों लोगों ने अपनी जान की बाजी लगाई थी। रजत जयंती वर्ष के अवसर पर उन शहीदों और आंदोलनकारियों को याद किया जा रहा है, जिनके संघर्ष से यह राज्य अस्तित्व में आया। इसी क्रम में शनिवार को देहरादून पुलिस लाइन में राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान में एक भव्य समारोह आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीएम पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में उपस्थित होकर 13 बलिदानी आंदोलनकारियों के स्वजन को सम्मानित किया।
उन्होंने कहा कि —
“उत्तराखंड राज्य हजारों आंदोलनकारियों के खून-पसीने की देन है। रामपुर तिराहे जैसी घटनाओं ने हमारी मातृशक्ति को झकझोरा, लेकिन आंदोलनकारी पीछे नहीं हटे। आज हम सभी उनके बलिदान को नमन करते हैं।”
मुख्यमंत्री की घोषणाएँ
राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान में मुख्यमंत्री धामी ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं —
- सभी शहीद स्मारकों का नवीनीकरण किया जाएगा।
- राज्य आंदोलन के आश्रितों की पेंशन ₹3000 बढ़ाकर ₹5500 की जाएगी।
- जेल गए और घायल आंदोलनकारियों की पेंशन ₹6000 से बढ़ाकर ₹7000 की जाएगी।
- अन्य आंदोलनकारियों की पेंशन ₹4500 से ₹5500 तक की जाएगी।
- विकलांग या शैय्या पर पड़े आंदोलनकारियों की सहायता राशि ₹20,000 से ₹30,000 की जाएगी।
- इनकी देखभाल के लिए एक मेडिकल अटेंडेंट की व्यवस्था की जाएगी।
- चिह्निकरण के लिए 2021 तक प्राप्त आवेदनों की अवधि छह माह बढ़ाई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुविधाएँ “सहायता” नहीं, बल्कि राज्य की कृतज्ञता का प्रतीक हैं।
कार्यक्रम में गरिमा पूर्ण उपस्थिति
इस अवसर पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि आंदोलनकारियों के बलिदान ने राज्य को नई पहचान दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की प्रेरणा से रजत जयंती उत्सव का आयोजन राज्य के गौरव के रूप में किया जा रहा है। सम्मान पाने वालों में आनंदी देवी रावत, धूम सिंह रावत, शांति ममगाई, गीता रावत, अमित ओबरॉय समेत कई आंदोलनकारियों के स्वजन शामिल रहे।
कार्यक्रम में लोकसभा सदस्य माला राज्यलक्ष्मी शाह, राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट और नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल व गणेश जोशी, विधायक उमेश शर्मा काऊ, विनोद चमोली, सविता कपूर, और राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल उपस्थित रहे।
संस्कृतिक और छात्र सहभागिता
दून इंटरनेशनल स्कूल और गोवर्धन सरस्वती इंटर कॉलेज के छात्रों ने राष्ट्रगीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मंच पर छात्रों की देशभक्ति प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।
भविष्य की दृष्टि
सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों से प्रेरणा लेकर आने वाले 25 वर्षों में उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाया जाएगा। उन्होंने आह्वान किया कि राज्य स्थापना दिवस पर हर व्यक्ति उन आंदोलनकारियों के नाम से पाँच दीप जलाए, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी।
स्थानीय दृष्टिकोण
देहरादून के एक राज्य आंदोलनकारी सुभाष रावत ने कहा, “आज का दिन हम सबके लिए भावनात्मक है। सरकार ने जो घोषणाएँ की हैं, वे सम्मान का प्रतीक हैं, इन्हें जल्द लागू किया जाना चाहिए।”
वहीं, एक छात्रा स्मृति पैन्यूली ने कहा, “हम उन नायकों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकते जिन्होंने हमारे लिए यह राज्य दिलाया।”
आगे की दिशा
मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि आने वाले महीनों में राज्य आंदोलनकारियों के कल्याण के लिए नई नीतियाँ और पेंशन पोर्टल भी शुरू किया जाएगा। साथ ही आंदोलन स्थलों और स्मारकों को पर्यटन सर्किट से जोड़ने की भी योजना पर विचार चल रहा है।






