
देहरादून: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय परीक्षा पेपर लीक मामले में CBI ने निलंबित असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को दो दिन की कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। CBI ने उनसे वॉट्सऐप चैट डिलीट करने, 10 मिनट में 12 सवाल हल भेजने और खालिद से संपर्क को लेकर कई सवाल पूछे, जिनका वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
21 सितंबर को आयोजित UKSSSC स्नातक स्तरीय परीक्षा का प्रश्नपत्र इंटरनेट पर वायरल हुआ था। जांच में पता चला कि पेपर के तीन फोटो हरिद्वार के आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज से अभ्यर्थी खालिद द्वारा बाहर भेजे गए थे। मामला गंभीर होने पर SIT और बाद में CBI को जांच सौंपी गई।
आधिकारिक जानकारी
CBI ने सुमन से उस चैट के बारे में पूछताछ की, जिसे उन्होंने पेपर लीक के तुरंत बाद डिलीट कर दिया था।
CBI ने मेटा से रिकवर डेटा के आधार पर यह जानना चाहा कि:
- उन्होंने 10 मिनट में ही 12 सवालों के जवाब खालिद को क्यों भेजे?
- जब खालिद ने सुबह 7:55 बजे संदेश भेजकर कहा कि उसकी बहन साबिया का पेपर चल रहा है, तो सुमन को क्यों संदेह नहीं हुआ कि परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र भेजना असंभव है?
- मामले के खुलासे के बाद उन्होंने साबिया से बात क्यों की और बाद में अपने फोन से पूरे चैट व उत्तरों को क्यों डिलीट किया?
इस पूछताछ में सुमन किसी भी सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाईं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
शहर में मामले को लेकर चर्चा जारी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि पेपर लीक घटनाओं से पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई आवश्यक है।
विशेषज्ञ टिप्पणी
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सबूतों का डिलीट होना जांच को और जटिल बनाता है, लेकिन रिकवरी तकनीक के माध्यम से तथ्य उजागर हो सकते हैं। CBI की पूछताछ का फोकस चैट रिकवरी और घटनाक्रम की टाइमलाइन पर केंद्रित है।
अब तक की कार्रवाई
- CBI और SIT अब तक तीन गिरफ्तारियाँ कर चुकी हैं—
- खालिद (मुख्य आरोपित)
- उसकी बहन साबिया
- असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन
- जांच में पाया गया कि प्रश्नपत्र सबसे पहले खालिद के माध्यम से बाहर आया था, जिसके बाद आगे प्रसारित हुआ।
- 27 अक्टूबर को केस CBI को सौंपा गया और सुमन 11 नवंबर से लगातार पूछताछ के दायरे में थीं।
- 28 नवंबर को CBI ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया।
- उनके जमानत आवेदन को विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण ने खारिज कर दिया।
आगे क्या
CBI को आशंका है कि पेपर लीक नेटवर्क में और लोग भी शामिल हो सकते हैं। यह जांच की जा रही है कि प्रश्नपत्र केवल खालिद के लाभ के लिए भेजा गया था या अन्य अभ्यर्थियों को भी नकल कराने की बड़ी साजिश थी।
CBI प्रकरण से जुड़े सभी डिजिटल और भौतिक सबूतों को जोड़ते हुए आगे की कार्रवाई कर रही है।






