
ऋषिकेश में लापरवाही के मामलों पर प्रशासनिक सख्ती एक बार फिर देखने को मिली, जब जिला अधिकारी सविन बंसल ने तहसील परिसर स्थित सब रजिस्टर कार्यालय में अचानक छापेमारी की। निरीक्षण के दौरान कार्यालय में कई गंभीर कमियां सामने आईं, जिन्हें लेकर डीएम नाराज नजर आए। उन्होंने मौके पर ही संबंधित दस्तावेज और कंप्यूटर कब्जे में लेने के निर्देश दिए और स्पष्ट किया कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब डीएम क्षेत्र में अन्य प्रशासनिक निरीक्षण के लिए पहुंचे थे।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
जिला अधिकारी सविन बंसल शुक्रवार को चंद्रेश्वर नगर के पास गंगा में गिर रहे गंदे नाले का निरीक्षण करने ऋषिकेश पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने अचानक तहसील परिसर जाने का निर्णय लिया। तहसील में पहुंचते ही डीएम ने वहां संचालित सब रजिस्टर कार्यालय का औचक निरीक्षण किया, जो बाद में छापेमारी में तब्दील हो गया।
तहसील और सब रजिस्टर कार्यालय आम नागरिकों से सीधे जुड़ी सेवाओं का केंद्र होते हैं। यहां पाई गई लापरवाही न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आम लोगों के अधिकारों और संपत्ति संबंधी मामलों को भी प्रभावित करती है। डीएम की यह कार्रवाई ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
पहले की घटनाओं का उल्लेख
हाल के महीनों में जिले के विभिन्न कार्यालयों में औचक निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक कमियों के मामले सामने आते रहे हैं। इससे पहले भी डीएम स्तर से लापरवाही पर कार्रवाई के संकेत दिए जाते रहे हैं, लेकिन इस छापेमारी को अब तक की सबसे सख्त कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी
निरीक्षण के दौरान सब रजिस्ट्रार की गैरमौजूदगी में रजिस्ट्री कार्य होते पाए गए, जिस पर डीएम का पारा चढ़ गया। अभिलेखों में कई तरह की खामियां मिलीं और मूल धारकों के महत्वपूर्ण दस्तावेज कार्यालय में लापरवाही से पड़े हुए पाए गए। इसके अलावा रजिस्ट्री की प्रतियां महीनों तक संबंधित धारकों को न दिए जाने की जानकारी भी सामने आई।
डीएम सविन बंसल ने कहा कि कार्यालय में कई गंभीर लापरवाहियां पाई गई हैं, जिन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कंप्यूटर और जरूरी दस्तावेज कब्जे में ले लिए गए हैं और जल्द ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि सब रजिस्टर कार्यालय में लंबे समय से अव्यवस्थाएं बनी हुई थीं। कुछ लोगों ने मौके पर ही डीएम को लिखित शिकायत सौंपते हुए अपने बयान दर्ज कराए और त्वरित कार्रवाई की मांग की।
आंकड़े / डेटा
निरीक्षण के दौरान कई रजिस्ट्री मामलों में दस्तावेज अधूरे पाए गए। कुछ मामलों में रजिस्ट्री की प्रतियां महीनों तक जारी नहीं की गई थीं, जिससे लोगों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे थे।
आगे क्या होगा
प्रशासन की ओर से जब्त किए गए दस्तावेजों और कंप्यूटर की जांच के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तय की जाएगी। उम्मीद है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर निलंबन या विभागीय कार्रवाई जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।







