
ऋषिकेश में 42 वर्षीय राजमिस्त्री रघु पासवान ने मृत्यु के बाद भी मानवता की मिसाल कायम की है। ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद शुक्रवार को एम्स ऋषिकेश में उनके केडवरिक अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई, जिससे पांच जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सकेगा। उनके अंगों को समय पर गंतव्य तक पहुंचाने के लिए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के नौ जिलों में ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इस दौरान हवाई और सड़क मार्ग का उपयोग किया गया, ताकि जीवनरक्षक अंगों को सुरक्षित और निर्धारित समय के भीतर संबंधित अस्पतालों तक पहुंचाया जा सके।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
रघु पासवान मनसा देवी क्षेत्र में रहकर राजमिस्त्री का काम करते थे। कुछ दिन पहले निर्माण कार्य के दौरान तीन मंजिला भवन से गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के लिए उन्हें एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया, जहां हालत बिगड़ने पर वह नॉन रिवर्सिबल कोमा में चले गए। चिकित्सकीय परीक्षणों के बाद विशेषज्ञों की समिति ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया।
ब्रेन डेड घोषित होने के बाद अंगदान का निर्णय
न्यूरो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. रजनीश अरोड़ा ने बताया कि सभी आवश्यक जांचों के बाद गुरुवार को रघु पासवान को ब्रेन डेड घोषित किया गया। इसके बाद चिकित्सकों की टीम ने महापौर शंभू पासवान के सहयोग से परिजनों से संपर्क कर अंगदान को लेकर काउंसिलिंग की। परिजनों की सहमति के बाद अंगदान का मानवीय निर्णय लिया गया।
ग्रीन कॉरिडोर से समय पर पहुंचे अंग
अंगों को निर्धारित समय में गंतव्य तक पहुंचाने के लिए एम्स ऋषिकेश से जौलीग्रांट एयरपोर्ट, दिल्ली और चंडीगढ़ तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। अंगों को पीजीआई चंडीगढ़, एम्स दिल्ली और आर्मी हॉस्पिटल आरआर दिल्ली भेजा गया।
एम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. श्रीलोय मोहंती के अनुसार, हार्ट को दोपहर एक बजे हवाई मार्ग से दिल्ली भेजा गया, जो ढाई बजे मरीज के बेड तक पहुंच गया। एम्स दिल्ली के लिए एक किडनी भेजी गई, जो शाम 4 बजकर 42 मिनट पर प्रत्यारोपण के लिए पहुंची। वहीं पीजीआई चंडीगढ़ के लिए लीवर, किडनी और पैंक्रियाज भेजे गए, जो शाम 4 बजकर 34 मिनट पर मरीजों तक पहुंचा दिए गए।
चिकित्सकीय टीम की अहम भूमिका
इस पूरी प्रक्रिया में न्यूरो सर्जन डॉ. रजनीश अरोड़ा सहित कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके साथ ही संस्थान की अंग प्रत्यारोपण इकाई, नर्सिंग स्टाफ और प्रशासनिक टीम ने आपसी समन्वय से इस जटिल प्रक्रिया को सफल बनाया। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन और विभिन्न जिला प्रशासनों के सहयोग से पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हुई।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि रघु पासवान ने अंगदान कर समाज को नई दिशा दिखाई है। उनका मानना है कि इस तरह की घटनाएं लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करती हैं और कई जरूरतमंदों को नया जीवन मिलता है।
आगे क्या होगा
एम्स के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. भारत भूषण भारद्वाज के अनुसार, रघु पासवान के अंगों से तीन अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती पांच मरीजों को जीवनदान मिलेगा। इसके अलावा उनकी दोनों आंखें भी दान की गई हैं। एम्स प्रशासन ने भविष्य में भी अंगदान को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान जारी रखने की बात कही है।







