
हरिद्वार: UKSSSC पेपर लीक मामले की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की अध्यक्षता में गठित एकल सदस्यीय जांच आयोग ने सोमवार को एचआरडीए सभागार में जनसंवाद और सुनवाई की। इस दौरान छात्र-छात्राओं, कोचिंग संचालकों और केंद्र व्यवस्थापकों ने खुलकर अपनी बात रखी।
कार्यक्रम में कई विद्यार्थियों ने शिकायत की कि परीक्षा में क्षेत्रीय भाषा पर आधारित सवालों की संख्या अत्यधिक होती है। उनका कहना था कि ऐसे प्रश्न मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों से जुड़े होते हैं, जिससे हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी इलाकों के विद्यार्थियों को कठिनाई होती है।
वहीं, कई केंद्र व्यवस्थापकों ने परीक्षा केंद्रों में लगाए गए जैमर की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कमजोर जैमर से सिग्नल की पूरी रोकथाम नहीं हो पाती और कुछ विद्यार्थियों को रेडिएशन की शिकायत भी होती है।
जनसंवाद के दौरान न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी ने कहा कि स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा 2025 के दौरान कथित पेपर लीक के आरोपों की जांच चल रही है। उन्होंने बताया कि अब तक हल्द्वानी, काठगोदाम और रुद्रपुर में भी लोक सुनवाई और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि जिनके पास नकल या पेपर लीक से संबंधित कोई साक्ष्य या जानकारी है, वे आयोग को प्रस्तुत कर सकते हैं। सरकार ने इस मामले में एसआईटी जांच के साथ-साथ सीबीआई जांच कराने का भी निर्णय लिया है।
न्यायमूर्ति ध्यानी ने कहा कि सरकार ने छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए परीक्षा को निरस्त किया है। जनसुनवाई के दौरान सचिव जांच आयोग बिक्रम सिंह राणा, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) दीपेंद्र सिंह नेगी, प्रशासनिक अधिकारी नवीन कुमार शर्मा और देवेंद्र जुयाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।







