
देहरादून: देश की 41 आयुध निर्माणियों में कार्यरत करीब 60 हजार कर्मचारियों में कॉरपोरेटकरण के बाद बढ़ती असुरक्षा और अव्यवस्था को लेकर रोष गहराता जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2021 में आयुध निर्माणियों के कॉरपोरेट ढांचे में जाने के बाद उनकी डेपुटेशन अवधि 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी गई, लेकिन इसके बावजूद सेवा शर्तों, आर्थिक सुरक्षा, पारिवारिक योजनाओं और प्रमोशन से जुड़ी कोई ठोस नीति अब तक लागू नहीं हो सकी है। देहरादून में कर्मचारियों ने प्रबंधन को ज्ञापन सौंपते हुए जल्द निर्णय की मांग की है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
कॉरपोरेटकरण के बाद सात नई कंपनियों के गठन के बावजूद कर्मचारियों का आरोप है कि वर्कलोड होने के बावजूद नई भर्तियां नहीं हो रहीं, प्रमोशन वर्षों से लंबित हैं और फैसलों को टालने के लिए कभी सुप्रीम कोर्ट तो कभी बोर्ड के निर्देशों का हवाला दिया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि इससे स्थायी और संविदा—दोनों वर्गों में भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
देहरादून स्थित सीजीएम, आप्टो इलेक्ट्रानिक्स फैक्ट्री को सौंपे गए ज्ञापन में कर्मचारियों ने मांग की कि सेवा शर्तों, प्रमोशन और भर्ती नीति पर स्पष्ट और समयबद्ध निर्णय लिया जाए। फिलहाल प्रबंधन की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से स्पष्ट नीति के अभाव में वे दबाव में काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि अनिश्चितता का असर न केवल कार्यक्षमता पर पड़ रहा है, बल्कि पारिवारिक और आर्थिक स्थिरता भी प्रभावित हो रही है।
आगे क्या होगा
महासंघ की हालिया वर्चुअल बैठक में स्थिति पर गंभीर चिंता जताई गई और अगले चरण की तैयारी के निर्देश दिए गए। इसके बाद नॉर्थ जोन में यूनिट-स्तर की बैठकों के बाद प्रबंधन को मांग-पत्र सौंपा गया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने समय रहते सेवा शर्तों, प्रमोशन और भर्ती नीति पर स्पष्ट फैसला नहीं किया, तो वे कड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।







