
ऋषिकेश: मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर तीर्थनगरी ऋषिकेश में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। रविवार तड़के से ही शहर के प्रमुख गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जहां लोगों ने गंगा स्नान कर पितरों की आत्मशांति के लिए तर्पण और दान किया। स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों और अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने भी इस पुण्य पर्व में भाग लिया।
मौनी अमावस्या को लेकर सुबह से दोपहर तक घाटों पर धार्मिक गतिविधियां चलती रहीं। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद दान-पुण्य कर परंपराओं का निर्वहन किया, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक माहौल बना रहा।
घाटों पर दिखा श्रद्धालुओं का उत्साह
मौनी अमावस्या के अवसर पर ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट, दत्तात्रेय घाट, रामानंद घाट, नाव घाट, साईं घाट, मुनिकीरेती स्थित दयानंद घाट, शत्रुघ्न घाट, स्वर्गाश्रम क्षेत्र के रामझुला घाट, सीता घाट और परमार्थ निकेतन घाट सहित अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई।
गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने अपने पितरों को तर्पण दिया और घाटों पर मौजूद भिक्षुकों को दान देकर पुण्य अर्जित किया।
धार्मिक महत्व
तुलसी मानस मंदिर के महंत रवि प्रपन्नाचार्य महाराज ने बताया कि मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान और पितरों के निमित्त तर्पण को विशेष पुण्यकारी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मौन रखकर स्नान और दान करने से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
मौनी अमावस्या के मद्देनज़र प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सभी प्रमुख गंगा घाटों पर पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस कर्मियों ने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी, वहीं किसी भी अनहोनी से बचाव के लिए जल पुलिस के जवान लाइफ जैकेट पहनकर गंगा में मुस्तैद दिखे।
यातायात व्यवस्था पर पड़ा असर
मौनी अमावस्या पर ऋषिकेश में स्थानीय लोगों के अलावा रानीपोखरी, देहरादून, रायवाला सहित अन्य क्षेत्रों और राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे, जिससे गंगा घाटों की ओर जाने वाले मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ गया।
त्रिवेणी घाट रोड पर वाहनों की नो एंट्री लागू रही, जबकि मायाकुंड मार्ग पर दोपहर बाद तक जाम की स्थिति बनी रही। मुनिकीरेती और स्वर्गाश्रम क्षेत्र में भी श्रद्धालुओं की अधिक आवाजाही के कारण यातायात प्रभावित रहा।
समापन
मौनी अमावस्या के अवसर पर ऋषिकेश में श्रद्धा, आस्था और परंपरा का संगम देखने को मिला। प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण ढंग से गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए।







