
देहरादून—पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कहा कि शीतकालीन चारधाम यात्रा को सफल बनाने के लिए प्रदेश सरकार को स्पष्ट मानक तय करने होंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बार-बार शीतकालीन यात्रा और वेडिंग डेस्टिनेशन के महत्व पर जोर देना स्वागतयोग्य है, लेकिन इसके लिए राज्य की ओर से ठोस तैयारी आवश्यक है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
शीतकालीन यात्रा को उत्तराखंड में पर्यटन विस्तार के बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है। चारधामों के कपाट बंद होने के बाद उनकी शीतकालीन पूजा अलग-अलग देवस्थलों में होती है, और श्रद्धालु वहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। राज्य सरकार पिछले वर्षों से इसे औपचारिक रूप देने की कोशिश में है, लेकिन अभी तक कोई व्यापक नीति या एसओपी स्पष्ट रूप से लागू नहीं हो सकी है।
हरीश रावत ने क्या कहा
देहरादून में मीडिया से बातचीत करते हुए हरीश रावत ने कहा कि चारधामों की शीतकालीन यात्रा तभी प्रेरक बन सकती है, जब इसके लिए मानक तय किए जाएं और प्रदेश सरकार इसे व्यवस्थित रूप से संचालित करे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में देवस्थल पहले से मौजूद हैं और हमारे वेद-ग्रंथ बताते हैं कि शीतकाल में देवता उन्हीं स्थानों पर विराजमान रहते हैं। वहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना भी होती है।
रावत ने कहा कि यात्रा को सफल बनाने के लिए जरूरत इस बात की है कि श्रद्धालुओं की आस्था, स्थानीय प्राकृतिक सौंदर्य, भोजन, वस्त्र, आभूषण और शिल्प को एक साथ जोड़कर एक व्यापक पर्यटन पैकेज तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि इस यात्रा से होमस्टे, रिजॉर्ट, होटल और स्थानीय व्यवसायों को भी बड़ा लाभ मिल सकता है।
2014 की पहल का उल्लेख
पूर्व मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि 2014 में कांग्रेस सरकार के समय शीतकालीन चारधाम यात्रा शुरू करने का प्रस्ताव किया गया था, जिसके लिए एक एसओपी भी तैयार की गई थी, ताकि यात्रा निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित हो सके। उन्होंने कहा कि यदि उस दिशा में निरंतरता रहती, तो आज शीतकालीन यात्रा और भी सशक्त रूप में खड़ी होती।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि शीतकालीन यात्रा से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बड़ी मजबूती मिल सकती है। वे इस बात से सहमत हैं कि यात्रा को सफल बनाने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और बेहतर आधारभूत संरचना की आवश्यकता है।
आगे क्या?
रावत की टिप्पणी के बाद अब उम्मीद है कि राज्य सरकार इस दिशा में और तेजी से पहल करेगी। शीतकालीन यात्रा को औपचारिक रूप देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के लिए विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द ही एक मजबूत नीति की जरूरत होगी।







