
ऋषिकेश में ई-बसों के संचालन के फैसले को लेकर उत्तराखंड विक्रम ऑटो रिक्शा, ई-ऑटो रिक्शा महासंघ ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। महासंघ ने इस निर्णय को छोटे परिवहन व्यवसायियों की रोजी-रोटी पर सीधा कुठाराघात बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो महासंघ ने उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है, जिससे शहर में परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
रविवार को यात्रा बस अड्डे के समीप एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में महासंघ पदाधिकारियों ने प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे अव्यावहारिक करार दिया।
ई-बस संचालन के खिलाफ अल्टीमेटम
ऑटो-विक्रम महासंघ अध्यक्ष महंत विनय सारस्वत ने बताया कि ई-बसों का संचालन रोकने के लिए प्रशासन को छह दिन का समय दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इस अवधि में निर्णय वापस नहीं लिया गया तो 24 जनवरी को आईडीपीएल से ऋषिकेश तक करीब साढ़े तीन हजार सवारी वाहनों की विरोध रैली निकाली जाएगी। इसके बाद सभी वाहन नगर निगम परिसर में खड़े कर विरोध दर्ज कराया जाएगा और फैसला वापस होने तक वाहन वहीं खड़े रहेंगे।
छोटे कारोबारियों की आजीविका का सवाल
उत्तराखंड परिवहन महासंघ अध्यक्ष सुधीर राय ने कहा कि ई-बसों का संचालन सीधे तौर पर छोटे परिवहन कारोबारियों की आजीविका को प्रभावित करेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में ऋषिकेश क्षेत्र में लगभग 1800 टेंपो, तीन हजार ऑटो और करीब 1500 ई-रिक्शा संचालित हैं, जिनसे हजारों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है।
उनका कहना है कि छोटे शहर में यदि 25 ई-बसें चलाई जाती हैं तो पहले से चल रहे वाहनों के लिए यात्रियों की संख्या घटेगी और बेरोजगारी का खतरा बढ़ेगा।
यातायात जाम की आशंका
महासंघ का यह भी कहना है कि ई-बसों के संचालन से शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या और गंभीर हो सकती है। संकरे मार्गों और पहले से अधिक वाहनों के दबाव के बीच ई-बसों का संचालन व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय परिवहन संगठनों से संवाद किया जाए।
प्रेसवार्ता में रहे मौजूद
प्रेसवार्ता में सुनील कुमार, विजेंद्र कंडारी, कमल सिंह राणा, राजेंद्र लांबा, संजय शर्मा, मुकेश तिवारी, जगजीत सिंह जग्गा, रवि गोस्वामी, सतीश नेगी, अश्वनी कुमार, कृष्णपाल और दीपेश कुमार सहित कई पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।
ई-बसों के संचालन को लेकर उठा यह विरोध आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। अब निगाहें प्रशासन की ओर हैं कि वह इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और छोटे परिवहन व्यवसायियों की चिंताओं का समाधान कैसे करता है।







