
देहरादून: गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या की दर्दनाक घटना के बाद बच्चों में बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग की लत को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। इस घटना के मद्देनज़र देहरादून जिला प्रशासन भी सतर्क हो गया है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने शुक्रवार को जिले के सभी स्कूलों को तत्काल एडवाइजरी जारी करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें बच्चों के डिजिटल व्यवहार, गेमिंग आदतों और मानसिक स्वास्थ्य पर सख्त निगरानी रखने को कहा गया है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
प्रशासन के अनुसार, हाल के वर्षों में ऑनलाइन गेमिंग का प्रभाव बच्चों की दिनचर्या और पढ़ाई पर तेजी से बढ़ा है। गाजियाबाद की घटना ने इस खतरे को और गहराई से उजागर कर दिया है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप न किया जाए, तो इसके परिणाम गंभीर और घातक हो सकते हैं। इसी को देखते हुए देहरादून में एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि ऑनलाइन गेम्स का अत्यधिक उपयोग बच्चों के मानसिक संतुलन को प्रभावित कर रहा है। प्रशासन को लगातार अभिभावकों से शिकायतें मिल रही हैं कि बच्चे देर रात तक मोबाइल पर गेम खेलते हैं, जिससे चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है और पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्कूल एडवाइजरी के माध्यम से इस मुद्दे को गंभीरता से लें और अभिभावकों को भी पूरी तरह जागरूक करें।
स्थानीय प्रतिक्रिया
दून के कई निजी स्कूलों ने माना है कि पिछले कुछ समय में छात्रों में गेमिंग लत से जुड़े व्यवहार तेजी से बढ़े हैं। स्कूल प्रबंधन के अनुसार, कई मामलों में छात्रों में सामाजिक दूरी, एकांतप्रियता और भावनात्मक असंतुलन देखने को मिला है, जिसके चलते काउंसलिंग सत्रों की संख्या भी बढ़ानी पड़ी है।
आंकड़े और तथ्य
विशेषज्ञों का कहना है कि टास्क-बेस्ड ऑनलाइन गेम बच्चों के मस्तिष्क पर नशे जैसी पकड़ बना लेते हैं। इससे बच्चे वास्तविक जीवन की चुनौतियों से कटने लगते हैं और उनका सामाजिक तथा भावनात्मक विकास प्रभावित होता है।
स्क्रीन टाइम और मोबाइल उपयोग पर नियंत्रण
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि स्कूलों की एडवाइजरी में अभिभावकों को स्क्रीन टाइम की सीमा तय करने, मोबाइल उपयोग को नियंत्रित रखने और संदिग्ध ऑनलाइन गेम्स से सतर्क रहने जैसे बिंदु स्पष्ट रूप से शामिल किए जाएं। इसके साथ ही, स्कूलों को छात्रों के लिए साइबर व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य और गेमिंग एडिक्शन पर विशेष जागरूकता सत्र आयोजित करने होंगे।
आगे क्या होगा
प्रशासन की ओर से स्कूलों में जारी एडवाइजरी के अनुपालन की निगरानी की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अभिभावकों और शिक्षकों के साथ संयुक्त बैठकें भी आयोजित की जा सकती हैं, ताकि बच्चों को सुरक्षित डिजिटल माहौल प्रदान किया जा सके।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
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