
टिहरी जिले के भिलंगना ब्लॉक के मगरौं–पौखाल क्षेत्र में मंगलवार रात गूंज संस्था के एक कर्मचारी पर भालू ने हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल कर्मचारी को श्रीनगर बेस अस्पताल से ऋषिकेश एम्स रेफर किया गया, लेकिन कीर्तिनगर के समीप उसने दम तोड़ दिया। घटना से क्षेत्र में दहशत फैल गई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
भिलंगना ब्लॉक के पौखाल और गडोलिया क्षेत्र में पिछले कई महीनों से भालू की गतिविधियां बढ़ने की शिकायतें मिल रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीवों की बढ़ती आवक से लोगों में भय का माहौल बना हुआ है, और कई बार वन विभाग को इस संबंध में जानकारी दी जा चुकी है।
घटना कैसे हुई
ग्राम खाल–पाली के प्रधान वीरेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि गूंज संस्था के कर्मचारी राकेश गिरी मंगलवार करीब आठ बजे सफाई किट से जुड़ा कार्य पूरा कर बाइक से मगरौं–पौखाल लौट रहे थे। रास्ते में अचानक भालू ने उन पर झपट्टा मारा, जिससे वे बाइक सहित सड़क पर गिरकर घायल हो गए। पीछे से आने वाले लोगों के शोर मचाने पर भालू जंगल की ओर भाग गया, लेकिन हमले की दहशत से राकेश गिरी घबराहट में बेहोश होते रहे।
स्थानीय लोगों ने उन्हें तुरंत श्रीनगर बेस अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताकर ऋषिकेश एम्स रेफर कर दिया। लेकिन कीर्तिनगर के पास उनकी मौत हो गई।
वन विभाग की जानकारी
पौखाल वन रेंज अधिकारी हर्षराम उनियाल ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद गडोलिया और आसपास के क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा कि जिस हमले का दावा किया जा रहा है, उसकी कोई आधिकारिक सूचना विभाग के पास दर्ज नहीं है और न ही कर्मचारियों की पूछताछ में ऐसे किसी हमले की पुष्टि हुई है। आसपास के क्षेत्र में भालू के पंजों के निशान भी नहीं मिले।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से भालू की संख्या और गतिविधियां बढ़ रही हैं। ग्राम स्वाड़ी के प्रधान राकेश कुमाईं ने बताया कि गडोलिया, स्वाड़ी, मोलनो, पौखाल, खाल, पाली और कोटी में भालू ने कई बार दहशत फैलाई है। ग्रामीणों ने वन विभाग से भालू को पकड़ने और संवेदनशील क्षेत्रों में पिंजरा लगाने की मांग दोहराई है।
एक ग्रामीण ने कहा, “रोज शाम के बाद बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा खतरे में हैं।”
आगे क्या
वन विभाग ने इलाके में गश्त बढ़ाने और गतिविधियों की निगरानी करने का आश्वासन दिया है। ग्रामीणों की मांग के आधार पर संवेदनशील स्थानों पर पिंजरे लगाने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। प्रशासन मामले की जांच जारी रखे हुए है।






