
देहरादून: उत्तराखंड में बीते एक सप्ताह से अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर जारी सियासी बवाल पर अब भारतीय जनता पार्टी खुलकर सामने आ गई है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बयान के बाद वरिष्ठ विधायक खजान दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी का आधिकारिक पक्ष रखा। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को सुनियोजित षड्यंत्र बताते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि इस तरह की बयानबाजी न केवल एक वरिष्ठ दलित नेता का अपमान है, बल्कि उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी की स्मृति के साथ भी अन्याय है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
अंकिता भंडारी हत्याकांड लंबे समय से उत्तराखंड की राजनीति में संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। हाल के दिनों में इस मामले को लेकर फिर से बयानबाजी तेज हुई है, जिसके बाद सत्तारूढ़ दल और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। इसी क्रम में बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना रुख स्पष्ट किया।
आधिकारिक जानकारी
बीजेपी विधायक खजान दास ने कहा कि इस पूरे मामले में बेहद आपत्तिजनक और अश्लील टिप्पणियां की जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने इसे दिल्ली तक प्रचारित किया, जो निंदनीय है। उनके अनुसार, यह एक वरिष्ठ दलित नेता के सम्मान को ठेस पहुंचाने का प्रयास है और इससे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचता है।
अपराधी को बचाने की नहीं हो रही कोशिश
खजान दास ने स्पष्ट किया कि अपराधी की न तो कोई जाति होती है और न ही बीजेपी किसी अपराधी को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले भी इस मामले में एसआईटी जांच हुई थी और दोषियों को कठोर सजा मिली है। यदि आगे कहीं जांच की आवश्यकता सामने आती है, तो सरकार और पार्टी जांच के लिए पूरी तरह तैयार है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
बीजेपी विधायक के अनुसार, जिस तरह से बार-बार बिना सबूत वरिष्ठ नेताओं के नाम इस प्रकरण से जोड़े जा रहे हैं, उससे आम जनता में नाराजगी है। उनका कहना है कि इस तरह का मीडिया ट्रायल किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप
खजान दास ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह की राजनीति दलित समाज के प्रति कांग्रेस की सोच को दर्शाती है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश का दलित समाज कांग्रेस के आरोप-प्रत्यारोप से आहत और नाराज है।
आगे क्या होगा
बीजेपी विधायक ने कहा कि यदि किसी के पास इस मामले से जुड़ा कोई ठोस सबूत है, तो उसे न्यायालय में पेश किया जाना चाहिए, न कि सोशल मीडिया के जरिए प्रचारित किया जाए। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।







