
देहरादून की फास्ट ट्रैक पोक्सो अदालत ने दुष्कर्म और आपराधिक धमकी के मामले में आरोप सिद्ध न होने पर आरोपित अरमान को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहियों से जबरन दुष्कर्म का मामला प्रमाणित नहीं होता।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यह मामला मई 2022 में डालनवाला कोतवाली में दर्ज हुआ था, जिसमें एक युवती ने आरोप लगाया था कि परिचित युवक अरमान ने उसे होटल ले जाकर दुष्कर्म किया और अश्लील फोटो खींचकर ब्लैकमेल किया। मामला गंभीर आरोपों के कारण फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुना गया।
आधिकारिक जानकारी
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पोक्सो) रजनी शुक्ला की अदालत ने दोनों पक्षों के तर्क, गवाहियाँ और साक्ष्य देखने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपित पर लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं होते, इसलिए उसे दोषमुक्त किया जाता है।
बचाव पक्ष के तर्क
बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि:
- यदि होटल में जबरन दुष्कर्म हुआ था, तो पीड़िता ने होटल स्टाफ को इसकी सूचना क्यों नहीं दी?
- दोनों के बीच पहले से जान-पहचान थी और प्रस्तुत फोटो व पत्र घटना से पहले के थे, जो उनकी सहमति दर्शाते हैं।
- पीड़िता ने होटल का कमरा खुद के आधार कार्ड से बुक कराया था, जिससे जबरदस्ती का दावा कमजोर होता है।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे, न कि बाध्यकारी परिस्थितियों में।
अभियोजन पक्ष की दलील
पीड़िता का कहना था कि आरोपी ने ब्लैकमेल के लिए अश्लील फोटो खींचे और धर्म परिवर्तन करवाकर शादी करने का दबाव बनाया। वह धमकियों के कारण कई बार दुष्कर्म का शिकार हुई।
हालांकि, अदालत ने पाया कि इन आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि दुष्कर्म जैसे संवेदनशील मामलों में साक्ष्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। केवल आरोप पर्याप्त नहीं होते, बल्कि उनके समर्थन में ठोस प्रमाण जरूरी हैं।
आगे क्या
अदालत द्वारा आरोपित को बरी किए जाने के बाद अब मामला समाप्त माना जाता है। यदि पीड़िता चाहे तो उच्च न्यायालय में फैसले के खिलाफ अपील दायर कर सकती है।






