
ऋषिकेश: चंद्रभागा नदी किनारे अवैध रूप से बसे लोगों पर शुक्रवार को नगर निगम ने दोबारा सख्त कार्रवाई की। जेसीबी के साथ पहुंची टीम ने 60 से अधिक कब्जाधारियों के अतिक्रमण ध्वस्त कर दिए। मौके पर विरोध के प्रयास भी हुए, लेकिन नगर निगम की सख्ती के आगे कब्जाधारियों की एक न चली।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
चंद्रभागा नदी का किनारा बीते कई वर्षों से अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहा है। बरसात के दौरान भी नगर निगम ने यहां कार्रवाई की थी और कब्जाधारियों को दोबारा अवैध बसावट न करने की चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद यहां फिर से झुग्गियां और अस्थायी ढांचे खड़े कर दिए गए, जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह और सुरक्षा जोखिम बढ़ने लगा।
आधिकारिक जानकारी
सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि पहले भी चेतावनी दी गई थी कि दोबारा अतिक्रमण न किया जाए, लेकिन फिर भी लोगों ने नदी तट पर कब्जा कर झुग्गियां बना लीं। निगम ने सभी ढांचों को हटाते हुए दोबारा कब्जा न करने की सख्त हिदायत दी है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अवैध बसावट नदी क्षेत्र की सुरक्षा और स्वच्छता के लिए खतरा बनती है, इसलिए नियमित कार्रवाई जारी रहेगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कब्जाधारियों ने आरोप लगाया कि नगर निगम बार-बार केवल कमजोर वर्गों को ही हटाता है, जबकि शहर में कई पक्के अतिक्रमण बने हुए हैं जिन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी किनारे अवैध बस्तियों से स्वच्छता और पर्यावरण पर असर पड़ रहा था, इसलिए कार्रवाई आवश्यक थी।
एक निवासी ने कहा कि अनेक बार चेतावनी के बाद भी दोबारा कब्जा करना भविष्य में और बड़े जोखिम पैदा करता है।
विशेषज्ञ टिप्पणी
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि नदी किनारे अवैध निर्माण मानसून में बड़े खतरे का कारण बनते हैं। ऐसे इलाकों को “नो-कंस्ट्रक्शन जोन” के रूप में सख्ती से लागू करना आवश्यक है, वरना हर वर्ष आपदा और सुरक्षा चुनौतियाँ बढ़ती जाएंगी।
आगे क्या
नगर निगम ने चेतावनी दी है कि यदि दोबारा कब्जा पाया गया तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। निगम की टीमें अब इस क्षेत्र में नियमित रूप से निगरानी भी करेंगी ताकि अतिक्रमण फिर से न हो सके। अधिकारियों ने कहा है कि भविष्य में पक्के अतिक्रमणों पर भी कार्रवाई करने की योजनाएं विचाराधीन हैं।







