
देहरादून: उत्तराखंड वन विकास निगम में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों के बीच पूर्वी हल्द्वानी लेगिंग प्रभाग के सहायक लेखाकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में फर्जी बिल बनाकर भुगतान, अवैध मानदेय स्वीकृति और दस्तावेजों में जालसाजी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड वन विकास निगम पिछले कई वर्षों से वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और आंतरिक प्रक्रियाओं में खामियों को लेकर विवादों में रहा है। विभागीय जांचें, एसआईटी जांच और कई मामलों में कार्रवाई ने निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इसी क्रम में पूर्वी हल्द्वानी से नया मामला सामने आया है।
नोटिस में लगाए गए गंभीर आरोप
पूर्वी हल्द्वानी लेगिंग प्रभाग के सहायक लेखाकार पर कई आरोप लगाए गए हैं। नोटिस में कुल आठ बिंदु शामिल हैं, जिनमें—
- उच्चाधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं करना
- वित्तीय स्वीकृतियों में लापरवाही
- बिना अनुमति आउटसोर्स एजेंसी को हजारों का भुगतान
- फर्जी बिल तैयार कर भुगतान लेने का प्रयास
- विभागीय कंप्यूटर में जालसाजी से तैयार दस्तावेजों का मिलना
इन आरोपों को गंभीर मानते हुए विभाग ने सहायक लेखाकार को जवाबदेह ठहराया है।
फर्जी बिल और जालसाजी का मामला
हाल ही में वन विकास निगम में फर्जी बिल बनाकर भुगतान लेने के मामले ने विभाग को हिलाकर रख दिया था। जांच में यह सामने आया कि
जाली दस्तावेज प्रभाग के सरकारी कंप्यूटर में ही तैयार किए गए।
नोटिस में कहा गया है कि यह कृत्य “धोखाधड़ी और कूटरचना” की श्रेणी में आता है, जिसके लिए सहायक लेखाकार को जिम्मेदार माना गया है।
कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका
विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि सहायक लेखाकार ने विभाग के एक पूर्व कंप्यूटर ऑपरेटर के साथ मिलकर शॉर्टकट तरीके से धोखाधड़ी करने का प्रयास किया था। इस मामले में ऑपरेटर को पहले ही बर्खास्त किया जा चुका है।
विभाग की कार्रवाई
लेगिंग प्रबंधक उपेंद्र सिंह ने नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब देने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि— “जवाब मिलते ही आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी।”
यदि अधिकारी समय पर उत्तर नहीं देते, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई तय मानी जा रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय क्षेत्र में इस मामले की चर्चा तेजी से फैल गई है। लोगों का कहना है कि वन विकास निगम में लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों ने विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। कई लोग विभागीय पारदर्शिता और कड़े नियंत्रण तंत्र की मांग कर रहे हैं।
आगे क्या?
विभागीय जांच आगे बढ़ाई जाएगी और सहायक लेखाकार द्वारा दिए गए जवाब के आधार पर अगला कदम तय होगा। गौरतलब है कि वन विकास निगम के कई मामलों में एसआईटी भी जांच कर रही है, जिससे आने वाले समय में और खुलासे हो सकते हैं।






