
धर्म डेस्क: देवभूमि उत्तराखंड का हर कोना भक्ति और अध्यात्म की आभा से ओतप्रोत है। इन्हीं पवित्र स्थलों में से एक है ऋषिकेश, जिसे योग, ध्यान और आध्यात्मिक साधना की राजधानी कहा जाता है। मां गंगा के निर्मल तट पर बसा यह पावन शहर हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचता है। जहां त्रिवेणी घाट की गंगा आरती आत्मा को शांति प्रदान करती है, वहीं लक्ष्मण झूला के पास स्थित आदि बद्रीनाथ द्वारकाधीश मंदिर अपनी प्राचीनता और धार्मिक मान्यता के कारण विशेष स्थान रखता है।
आदि गुरु शंकराचार्य से जुड़ी पौराणिक मान्यता
स्थानीय परंपराओं के अनुसार, आदि बद्रीनाथ द्वारकाधीश मंदिर की स्थापना स्वयं आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी। उन्होंने देशभर में चार धाम यात्रा की परंपरा स्थापित की थी, और यह मंदिर उसी यात्रा का प्रतीक माना जाता है। उस समय जब न सड़कें थीं न वाहन, तब श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों से पैदल बद्रीनाथ धाम की यात्रा करते थे। अनेक बार यात्रा बीच में ही अधूरी रह जाती थी।
कहा जाता है कि जो यात्री किसी कारणवश बद्रीनाथ धाम नहीं पहुंच पाते थे, वे इस मंदिर में आकर भगवान विष्णु के चरणों में प्रणाम करते थे। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से उन्हें वही पुण्य फल प्राप्त होता है जो बद्रीनाथ धाम की यात्रा पूरी करने से मिलता है। इसी कारण यह मंदिर आज भी ‘अधूरी यात्रा को पूर्ण करने वाला धाम’ कहलाता है।
द्वारकाधीश रूप में विराजमान भगवान विष्णु
मंदिर में भगवान विष्णु द्वारकाधीश स्वरूप में विराजमान हैं। मंदिर की प्राचीन वास्तुकला और शांत वातावरण श्रद्धालुओं के मन में गहरी भक्ति और श्रद्धा का भाव भर देता है। पूजा-अर्चना के समय घंटियों की ध्वनि और गंगा की कलकल मिलकर ऐसा वातावरण रचते हैं जो मन को दिव्यता से भर देता है।
मंदिर के पुजारी संदीप भारद्वाज के अनुसार, “हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस मंदिर का इतिहास जितना प्राचीन है, उसकी आस्था उतनी ही गहरी है। यहां आने वाला हर भक्त भगवान बद्रीनाथ और द्वारकाधीश दोनों के दर्शन का पुण्य अर्जित करता है।”
देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु
आदि बद्रीनाथ द्वारकाधीश मंदिर न केवल स्थानीय भक्तों के लिए बल्कि विदेशी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है। ऋषिकेश आने वाला कोई भी श्रद्धालु इस पवित्र मंदिर में माथा टेकना नहीं भूलता। विशेष अवसरों और पर्वों पर यहां भव्य पूजा और उत्सव का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
ऋषिकेश का आध्यात्मिक वैभव
ऋषिकेश केवल योग की नगरी ही नहीं, बल्कि वह स्थान है जहां गंगा, अध्यात्म और आस्था एक साथ प्रवाहित होती हैं। त्रिवेणी घाट, लक्ष्मण झूला, और इस आदि बद्रीनाथ द्वारकाधीश मंदिर जैसे स्थल इस शहर को देवभूमि का जीवंत स्वरूप बनाते हैं।
यदि आप ऋषिकेश की यात्रा पर हों, तो गंगा तट पर स्थित इस प्राचीन मंदिर में दर्शन अवश्य करें — क्योंकि कहा जाता है, “यहां का एक दर्शन, बद्रीनाथ यात्रा के समान पुण्य प्रदान करता है।”







