
देहरादून: पुरानी जिला जज अदालत के सिविल परिसर में रैन बसेरा (नाइट शेल्टर) बनाए जाने के प्रस्ताव को लेकर मंगलवार को अधिवक्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। वकीलों ने हरिद्वार रोड पर करीब दो घंटे तक चक्का जाम रखा, जिससे ट्रैफिक बाधित रहा। बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने उनकी मांग नहीं मानी, तो बुधवार को तीन घंटे का चक्का जाम किया जाएगा और न्यायालय का कार्य पूरी तरह बंद रहेगा।
रैन बसेरा निर्माण प्रस्ताव पर अधिवक्ताओं का विरोध
जिला अदालत परिसर में रैन बसेरा बनाए जाने का प्रस्ताव अधिवक्ताओं को नागवार गुज़रा। बार एसोसिएशन का कहना है कि यह भूमि वकीलों के चेंबर निर्माण के लिए आरक्षित की जानी चाहिए, न कि किसी अन्य उद्देश्य के लिए। अधिवक्ताओं का आरोप है कि प्रशासन ने बार एसोसिएशन से बिना चर्चा किए यह निर्णय लिया।
बार एसोसिएशन अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल ने कहा कि—
“जब तक प्रशासन हमारी बात नहीं सुनेगा, हम प्रदर्शन का समय बढ़ाते रहेंगे। मंगलवार को दो घंटे जाम रखा गया, बुधवार को तीन घंटे तक चक्का जाम रहेगा।”
हरिद्वार रोड पर दो घंटे तक चक्का जाम
मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक सैकड़ों वकील हरिद्वार रोड पर बैठ गए। इस दौरान ट्रैफिक पूरी तरह ठप रहा और पुलिस को रूट डायवर्ट करना पड़ा। वकीलों के प्रदर्शन के चलते कोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
बार एसोसिएशन के सचिव राजबीर बिष्ट ने बताया कि—
“हमारा प्रदर्शन चरणबद्ध तरीके से चल रहा है। पहले दिन एक घंटे, दूसरे दिन दो घंटे और तीसरे दिन तीन घंटे चक्का जाम रखा जाएगा।
जब तक प्रशासन संवाद नहीं करेगा, प्रदर्शन जारी रहेगा।”
न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप
बार एसोसिएशन ने निर्णय लिया है कि प्रदर्शन के दौरान सभी न्यायिक कार्य, जैसे—बस्ते का कार्य, टाइपिंग, स्टांप बिक्री और अन्य सेवाएँ दोपहर 1:30 बजे तक पूरी तरह बंद रहेंगी। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह विरोध प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए है, ताकि रैन बसेरा योजना को रद्द किया जा सके।
वकीलों की मांग है कि प्रशासन विवादित भूमि को वकीलों के चेंबर निर्माण के लिए उपलब्ध कराए ताकि अधिवक्ताओं को कार्य करने के लिए पर्याप्त स्थान मिल सके।
प्रशासन की चुप्पी पर नाराज़गी
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को भी किसी प्रशासनिक अधिकारी ने संपर्क नहीं किया। वकीलों ने कहा कि यदि प्रशासन अब भी चुप्पी साधे रहेगा, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।





