
देहरादून: उत्तराखंड भले ही प्रत्यक्ष रूप से आतंकी घटनाओं से अछूता रहा हो, लेकिन आतंकी नेटवर्क की छाया समय-समय पर इस शांत पहाड़ी राज्य तक पहुंचती रही है। देश की सुरक्षा एजेंसियों ने कई बार आतंकियों और उनके समर्थकों को राज्य में छिपे या सक्रिय नेटवर्क से जोड़ा है। अब उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह राज्य को किसी भी देशविरोधी गतिविधियों की शरणस्थली नहीं बनने देगी।
आतंकियों के कदमों के निशान: उत्तराखंड तक पहुंची जांच
पिछले चार दशकों में आतंकवाद से सीधे जुड़ा कोई बड़ा हमला उत्तराखंड में नहीं हुआ, लेकिन खुफिया एजेंसियों की जांच की दिशा कई बार यहां तक पहुंची है। कभी कोई आतंकी यहां नेटवर्क चलाने की फिराक में था, तो कोई घटना के बाद यहां छिपा।
1980 के दशक में खालिस्तान आंदोलन के दौर में ऊधमसिंह नगर जिला आतंकियों की गतिविधियों से प्रभावित रहा। उस समय पुलिस और आतंकियों के बीच कई मुठभेड़ें हुईं, जबकि पंजाब पुलिस ने भी स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर कई संयुक्त ऑपरेशन चलाए।
देहरादून में 2015 में पकड़ा गया नाभा जेलब्रेक का मास्टरमाइंड
1990 के दशक में आतंकियों का नेटवर्क कमजोर पड़ा, लेकिन उत्तराखंड को कई ने छिपने की सुरक्षित जगह के रूप में इस्तेमाल किया। नाभा जेल ब्रेक केस के मास्टरमाइंड परमिंदर उर्फ पेंदा और उसका साथी 2015 में देहरादून पुलिस के हत्थे चढ़े। वे पंजाब में की गई घटना के बाद उत्तराखंड में पनाह लिए हुए थे।
हरिद्वार और रुड़की में भी आतंकियों की गतिविधियां
गढ़वाल क्षेत्र के हरिद्वार और रुड़की इलाकों में भी कई बार केंद्रीय एजेंसियां आतंकियों का पीछा करते हुए पहुंची हैं। इनमें लश्कर-ए-तैयबा, आईएसआई नेटवर्क, और गजवा-ए-हिंद मॉड्यूल से जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारियां हुईं।
वर्ष 2016 में हरिद्वार अर्धकुंभ के दौरान आईएसआईएस से जुड़े चार संदिग्ध आतंकवादी पकड़े गए थे, जो अर्धकुंभ में बड़ी घटना को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे। उन्हें एनआईए और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने स्थानीय पुलिस की मदद से गिरफ्तार किया।
कब-कब पकड़े गए संदिग्ध आतंकी
| तारीख | गिरफ्तारी / मामला | विवरण |
|---|---|---|
| 06 फरवरी 2018 | लश्कर-ए-तैयबा नेटवर्क | अब्दुल समद को हवाला के जरिये धन जुटाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। |
| 20 अप्रैल 2018 | आईएसआई एजेंट | यूपी एटीएस ने डीडीहाट से रमेश सिंह कन्याल को आईएसआई को सूचना देने के आरोप में पकड़ा। |
| 10 सितंबर 2018 | खालिस्तानी मूवमेंट | ऊधमसिंह नगर पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रचार करने वाले दो संदिग्धों को पकड़ा। |
| 17 सितंबर 2018 | हत्या की साजिश | धारचूला से संदिग्ध गिरफ्तार, तत्कालीन रक्षा मंत्री की हत्या की साजिश रचने का आरोप। |
| 06 जून 2019 | बब्बर खालसा नेटवर्क | हरचरण सिंह को हथियार जुटाने और सप्लाई करने के आरोप में ऊधमसिंह नगर से पकड़ा गया। |
| 21 जुलाई 2019 | सोशल मीडिया जांच | हल्द्वानी के 52 लोगों की खालिस्तानी मूवमेंट से जुड़ाव की जांच शुरू की गई। |
| 01 फरवरी 2020 | खालिस्तानी लिबरेशन फोर्स | यूपी एटीएस ने रुड़की से आशीष सिंह को गिरफ्तार किया। |
| 03 नवंबर 2022 | गजवा-ए-हिंद मॉड्यूल | यूपी एटीएस और उत्तराखंड एसटीएफ ने ज्वालापुर से संदिग्ध को पकड़ा। |
पुलिस और एजेंसियों की सतर्कता
उत्तराखंड पुलिस अब किसी भी संदिग्ध गतिविधि को लेकर शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रही है।
राज्य में सभी खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर निगरानी बढ़ाई गई है। विशेष रूप से सीमावर्ती जिलों — पिथौरागढ़, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार में संदिग्धों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि —
“उत्तराखंड को आतंकियों की शरणस्थली नहीं बनने दिया जाएगा। हर संदिग्ध गतिविधि पर पुलिस और खुफिया एजेंसियां चौबीसों घंटे निगरानी रख रही हैं।”






