
देहरादून: उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ₹8260 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राज्य को कोई नई सौगात नहीं दी, बल्कि जिन दो बड़ी परियोजनाओं — जमरानी बांध और सौंग बांध — का जिक्र किया, उन्हें राष्ट्रीय परियोजना के रूप में मंजूरी यूपीए सरकार ने दी थी।
पीएम मोदी की घोषणाएं और कार्यक्रम का विवरण
रविवार को उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती पर देहरादून स्थित एफआरआई मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने ₹8260 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।
घोषित योजनाओं में प्रमुख रूप से —
- जमरानी बांध परियोजना (नैनीताल)
- सौंग बांध परियोजना (देहरादून)
- देहरादून जलापूर्ति कवरेज,
- पिथौरागढ़ में नया विद्युत सब स्टेशन,
- सरकारी भवनों में सौर संयंत्र,
- हल्द्वानी में एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने 28 हजार से अधिक किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत ₹62 करोड़ रुपये की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में जारी की। उन्होंने इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया और प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
हरीश रावत का बयान और राजनीतिक प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से प्रधानमंत्री की घोषणाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा —
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन दो परियोजनाओं का जिक्र किया, उन्हें राष्ट्रीय परियोजना के रूप में यूपीए सरकार ने पहले ही मंजूरी दे दी थी। पीएम मोदी ने कोई नई सौगात नहीं दी।”
उन्होंने कहा कि “प्रदेश की जनता को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री उत्तराखंड के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा करेंगे, ताकि आपदा, पलायन और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से निपटा जा सके, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।”
हरीश रावत ने आगे कहा कि “प्रधानमंत्री की यात्रा से जो वास्तविक अपेक्षाएं जुड़ी थीं, वे अधूरी रह गईं। राज्य के विकास के लिए ठोस योजना और रोजगार सृजन की घोषणा की उम्मीद थी।”
राजनीतिक पृष्ठभूमि और सियासी असर
हरीश रावत अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं और कई बार उनकी टिप्पणियों से उत्तराखंड की राजनीति में हलचल मच चुकी है। इस बार भी पीएम मोदी के रजत जयंती संबोधन के तुरंत बाद उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। कांग्रेस ने जहां इसे “सत्य उजागर करने वाला बयान” बताया, वहीं भाजपा नेताओं ने इसे “राजनीतिक हताशा” करार दिया।
कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप
कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि “जमरानी और सौंग बांध परियोजनाओं की नींव यूपीए शासनकाल में रखी गई थी और कांग्रेस सरकार ने ही इन्हें राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था।”
वहीं, भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि “कांग्रेस ने केवल फाइलों में योजनाएं रखीं, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने इन्हें धरातल पर उतारने का काम किया है।”
स्थानीय प्रतिक्रियाएं
देहरादून और नैनीताल क्षेत्र के लोगों का कहना है कि “अगर ये परियोजनाएं अब तेजी से आगे बढ़ेंगी तो जनता को राहत मिलेगी, चाहे मंजूरी किसी भी सरकार में मिली हो।”
कई स्थानीय किसानों ने कहा कि “जमरानी बांध से सिंचाई और पेयजल की समस्या दूर होने की उम्मीद है।”







