
देहरादून: लंबे समय से चली आ रही कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं में आखिरकार तेजी आ गई है। राज्य कैबिनेट में वर्तमान में पांच पद खाली पड़े हैं, जिनमें चार लंबे समय से रिक्त हैं, जबकि एक पूर्व संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के लोकसभा चुनाव लड़ने के बाद इस्तीफे से खाली हुआ। भाजपा विधायकों में इन पदों को भरने का बेचैन इंतजार है, लेकिन कई दौर की चर्चाओं के बावजूद अब तक कोई फैसला नहीं हो सका।
कैबिनेट में खाली पड़े पांच पद: इतिहास और वर्तमान स्थिति
उत्तराखंड कैबिनेट में अधिकतम 12 सदस्यों की सीमा है, और वर्तमान में सात मंत्री ही सक्रिय हैं। चार पद लंबे समय से खाली हैं, जो चंदन राम दास जैसे पूर्व मंत्रियों के निधन या अन्य कारणों से रिक्त हुए। वहीं, प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे ने हाल ही में एक और कुर्सी खाली कर दी। भाजपा विधायकों की नाराजगी और पार्टी के आंतरिक दबाव के बीच यह विस्तार जरूरी माना जा रहा है। कई जिलों जैसे उत्तरकाशी, हरिद्वार, पिथौरागढ़ आदि का कोई प्रतिनिधित्व न होने से क्षेत्रीय संतुलन भी एक बड़ा मुद्दा है।
सीएम धामी की दिल्ली यात्रा: हरी झंडी का इंतजार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शीर्ष नेतृत्व से इस मुद्दे पर पहले भी बातचीत की है, और अब एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बताया कि उन्होंने सीएम धामी से इस संबंध में विस्तृत चर्चा की। भट्ट ने कहा, “सीएम 17 अक्टूबर को दिल्ली रवाना हो रहे हैं। वहां शीर्ष नेतृत्व से हरी झंडी मिलने के बाद कैबिनेट विस्तार प्रक्रिया तेज कर दी जाएगी।” यह यात्रा संकेत दे रही है कि फैसला अब अंतिम चरण में है।
विस्तार में देरी के कारण: निकाय चुनाव से आपदा तक
प्रदेश अध्यक्ष भट्ट ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट विस्तार उनका प्रमुख लक्ष्य रहा है, लेकिन विभिन्न कारणों से यह टलता रहा। उन्होंने कहा, “पहले निकाय चुनाव, फिर पंचायत चुनाव, उसके बाद उपचुनाव और हाल की आपदा जैसी घटनाओं ने घोषणा को रोका।” इन चुनौतियों के बावजूद, भट्ट ने आश्वासन दिया कि अब इंतजार खत्म होने वाला है। जल्द ही पांच नए सदस्य कैबिनेट में शामिल होंगे, जो पार्टी की रणनीति और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को मजबूत करेंगे।
राजनीतिक प्रभाव: भाजपा की मजबूती और विधायकों की उम्मीदें
यह विस्तार न केवल कैबिनेट को पूर्ण करेगा, बल्कि भाजपा के आंतरिक समीकरणों को भी संतुलित करेगा। कई विधायकों के नाम चर्चा में हैं, जिनमें गंगोलीहाट के फकीर राम टम्टा, रुद्रप्रयाग के भरत सिंह चौधरी और गंगोत्री के विधायक जैसे चेहरे शामिल हैं। भट्ट के बयान से विधायकों में उत्साह है, और यह कदम धामी सरकार की स्थिरता को बढ़ावा देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विस्तार आगामी चुनावों के लिए भाजपा की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
यह कैबिनेट विस्तार उत्तराखंड की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ सकता है। क्या आपको लगता है कि यह समय पर हो रहा है? अपनी राय कमेंट्स में साझा करें!







