
हरिद्वार: श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े ने एक अहम निर्णय लेते हुए महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरि महाराज का निष्कासन समाप्त कर दिया है। अखाड़े की ओर से गठित जांच समिति की संस्तुति के बाद उन्हें पुनः सम्मानपूर्वक अखाड़े में शामिल कर लिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब 2027 के अर्धकुंभ को लेकर साधु-संतों और प्रशासन के बीच बयानबाजी को लेकर विवाद सामने आया था। अखाड़े के इस निर्णय को संत समाज में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
पिछले दिनों कतिपय अखाड़ा विरोधी गतिविधियों और सार्वजनिक बयानबाजी को लेकर महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरि महाराज को जूना अखाड़े से निष्कासित किया गया था। इस प्रकरण की जांच के लिए अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक के निर्देश पर एक समिति गठित की गई थी।
यह समिति वरिष्ठ सभापति महंत प्रेमगिरी महाराज की अध्यक्षता में बनाई गई थी, जिसमें अखाड़े के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल थे।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष महंत मोहन भारती ने बताया कि जांच समिति ने पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की। जांच में यह सामने आया कि महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरि महाराज के खिलाफ लगाए गए कई आरोप भ्रामक और तथ्यहीन थे।
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर अंतरराष्ट्रीय संरक्षक महंत हरी गिरी के निर्देश पर उनका निष्कासन समाप्त कर दिया गया। अखाड़े की ओर से कहा गया कि उनकी वापसी उनकी प्रतिष्ठा और सम्मान के अनुरूप की गई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
संत समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि यह फैसला अखाड़े की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया और न्यायसंगत दृष्टिकोण को दर्शाता है। कई संतों ने इसे आपसी संवाद और जांच के जरिए विवाद सुलझाने का सकारात्मक उदाहरण बताया है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
नवंबर 2025 में हरिद्वार के देवपुरा चौक स्थित एक आश्रम में साधु-संतों की बैठक हुई थी। इस बैठक में 2027 अर्धकुंभ की व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई गई थी और प्रशासन पर भेदभाव के आरोप लगाए गए थे। इस बैठक से जुड़े वीडियो के सामने आने के बाद जूना अखाड़े ने महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरि महाराज और स्वामी प्रबोधानंद गिरि को निष्कासित कर दिया था।
हालांकि, स्वामी प्रबोधानंद गिरि की अभी अखाड़े में वापसी नहीं हुई है, जबकि यतींद्रानंद गिरि को पुनः शामिल कर लिया गया है।
आगे क्या होगा
अखाड़ा सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में अर्धकुंभ 2027 की तैयारियों को लेकर अखाड़ा और संत समाज के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। अखाड़े की मंशा है कि किसी भी प्रकार का आंतरिक विवाद आयोजन की तैयारियों में बाधा न बने।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
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