
उत्तराखंड के कोटद्वार शहर में एक साधारण दुकान के नाम ने पूरे देश में बहस छेड़ दी है। ‘बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर’ नामक दुकान, जो पिछले 30 सालों से मुस्लिम व्यापारी वकील अहमद द्वारा संचालित है, अचानक विवादों के केंद्र में आ गई। बजरंग दल के सदस्यों ने दावा किया कि ‘बाबा’ शब्द हिंदू धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, क्योंकि यह स्थानीय सिद्धबली बाबा मंदिर से जुड़ा है। लेकिन इस घटना में एक स्थानीय जिम संचालक दीपक कुमार की एंट्री ने इसे सामाजिक सद्भाव की मिसाल बना दिया। आइए, इस कोटद्वार बाबा विवाद की पूरी कहानी जानते हैं।
विवाद की शुरुआत: गणतंत्र दिवस पर हंगामा
26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के मौके पर कोटद्वार के पटेल मार्ग पर स्थित इस दुकान पर बजरंग दल के कार्यकर्ता पहुंचे। उन्होंने दुकानदार वकील अहमद, जो 70 वर्षीय हैं और पार्किंसन बीमारी से पीड़ित हैं, से ‘बाबा’ शब्द हटाने की मांग की। उनका तर्क था कि ‘बाबा’ शब्द सिद्धबली बाबा हनुमान मंदिर से जुड़ा है, जो कोटद्वार का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। दुकानदार ने स्पष्ट किया कि नाम पुराना ब्रांड है और इसमें कोई धार्मिक इरादा नहीं है। लेकिन विवाद बढ़ गया, और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
मोहम्मद दीपक की बहादुर एंट्री: ‘मेरा नाम मोहम्मद दीपक है’
इस हंगामे के बीच दीपक कुमार, जो पास में जिम चलाते हैं, ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने बजरंग दल के सदस्यों से सवाल किया कि ‘बाबा’ शब्द पर किसी का एकाधिकार क्यों? वीडियो में दीपक खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताते हुए कहते हैं कि संविधान सबको बराबर अधिकार देता है। उनकी इस बहादुरी ने उन्हें सोशल मीडिया पर हीरो बना दिया। घटना के बाद उनके फॉलोअर्स की संख्या फेसबुक पर 1,500 से बढ़कर 4.3 लाख और इंस्टाग्राम पर 1,000 से 5 लाख हो गई। दीपक ने बाद में कहा कि वे डरते नहीं हैं और जरूरत पड़ने पर फिर ऐसा करेंगे।
तनाव का बढ़ना: प्रदर्शन, FIR और पुलिस कार्रवाई
विवाद थमने के बजाय बढ़ गया। 31 जनवरी को बजरंग दल के 30-40 सदस्य देहरादून और ऋषिकेश से कोटद्वार पहुंचे और दीपक के जिम व घर के बाहर प्रदर्शन किया। नारे लगाए गए और वीडियो बनाए गए। बाजार बंद हो गए, और माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने फ्लैग मार्च किया और तीन FIR दर्ज कीं: एक दीपक कुमार और उनके दोस्त विजय रावत के खिलाफ हमला व धमकी के आरोप में, दूसरी बजरंग दल के सदस्यों के खिलाफ, और तीसरी सड़क जाम करने पर। SSP पौड़ी ने कहा कि मामला सुलझ गया है, दुकान का नाम नहीं बदलेगा, और बाहरी संगठनों को शहर में घुसने नहीं दिया जाएगा।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं: राहुल गांधी से भीम आर्मी तक
यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दीपक की तारीफ की और उन्हें ‘बब्बर शेर’ कहा। वहीं, भीम आर्मी के कार्यकर्ता दीपक के समर्थन में कोटद्वार जाने की कोशिश में हरिद्वार में पुलिस से भिड़ गए। विवाद रुद्रपुर तक फैल गया, जहां ‘मैं भी मोहम्मद दीपक’ पोस्ट पर VHP और बजरंग दल ने विरोध जताया। सोशल मीडिया पर #KotdwarBaba और #MohammadDeepak ट्रेंड कर रहे हैं।
‘बाबा’ शब्द का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
‘बाबा’ फारसी मूल का शब्द है, जिसका अर्थ पिता, दादा या बुजुर्ग होता है। यह हिंदू, मुस्लिम, सिख और सूफी परंपराओं में इस्तेमाल होता है – जैसे बाबा फरीद, साईं बाबा या पीर बाबा। कोटद्वार में कई दुकानें ‘बाबा’ नाम से चलती हैं, चाहे मालिक हिंदू हों या मुस्लिम। यह विवाद दिखाता है कि कैसे सांस्कृतिक शब्दों को सांप्रदायिक रंग दिया जा सकता है।
संपादकीय विचार: सद्भाव की जरूरत, नफरत की नहीं
कोटद्वार बाबा विवाद उत्तराखंड जैसे शांत राज्य में सांप्रदायिक तनाव का उदाहरण है। एक तरफ बजरंग दल का विरोध जायज लग सकता है अगर धार्मिक भावनाएं आहत हों, लेकिन दबाव और धमकी गलत है। दूसरी तरफ, दीपक कुमार की बहादुरी हमें याद दिलाती है कि इंसानियत धर्म से ऊपर है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन ऐसे मुद्दों को रोकने के लिए सामुदायिक संवाद जरूरी है। भारत की विविधता हमारी ताकत है, नफरत इसे कमजोर न करे। क्या ‘बाबा’ जैसे शब्दों पर बहस से ज्यादा महत्वपूर्ण सामाजिक एकता नहीं है? पाठकों, अपनी राय कमेंट्स में साझा करें।
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