
नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले में पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में जेल में सजा काट रहे आरोपी को बड़ी राहत मिली है। भीमताल थाने में वर्ष 2023 में दर्ज दुष्कर्म के मामले में हल्द्वानी स्थित पॉक्सो कोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने पाया कि नवजात शिशु की जैविक माता पीड़िता है, लेकिन आरोपी जैविक पिता नहीं है। करीब तीन साल तक चले मुकदमे के बाद आए इस फैसले ने मामले की दिशा ही बदल दी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पॉक्सो अधिनियम के मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्य की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। वर्ष 2023 में दर्ज इस प्रकरण में नाबालिग पीड़िता के गर्भवती होने और शिशु के जन्म के बाद आरोपी पर गंभीर आरोप लगे थे। मामला लंबे समय तक न्यायालय में विचाराधीन रहा और आरोपी को न्यायिक हिरासत में रहना पड़ा।
आधिकारिक जानकारी
हल्द्वानी पॉक्सो कोर्ट ने मामले में प्रस्तुत डीएनए रिपोर्ट का परीक्षण करते हुए यह पाया कि नवजात शिशु की जैविक माता पीड़िता है, लेकिन आरोपी जैविक पिता नहीं है। इस निष्कर्ष के आधार पर विशेष न्यायाधीश ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5 (j) (ii)/6 के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
स्थानीय / मानवीय आवाजें
कानूनी जानकारों का कहना है कि इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि गंभीर मामलों में भी वैज्ञानिक साक्ष्य निर्णायक भूमिका निभाते हैं। स्थानीय लोगों ने भी उम्मीद जताई कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही निर्णय होना चाहिए।
आंकड़े / तथ्य
मामले में अभियोजन पक्ष ने पीड़िता सहित कुल आठ गवाह पेश किए थे। पीड़िता के परिवार के सदस्यों ने कथानक का समर्थन नहीं किया, जबकि पीड़िता ने आरोपों की पुष्टि की थी। डीएनए जांच के बाद ही मामले में निर्णायक मोड़ आया।
आगे क्या होगा
दोषमुक्ति के आदेश के बाद आरोपी को कानूनी रूप से राहत मिल गई है। हालांकि, न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इस फैसले को पॉक्सो मामलों में डीएनए जांच की अहमियत के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।






