
देहरादून सहित पूरे उत्तराखंड में आखिरकार मौसम मेहरबान हो गया है। बसंत पंचमी के अवसर पर प्रदेश को 92 दिन बाद व्यापक वर्षा और बर्फबारी की सौगात मिली है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, औली, हेमकुंड साहिब और आदि कैलास सहित ऊंचाई वाले इलाकों में भारी हिमपात दर्ज किया गया, जबकि मैदानी क्षेत्रों में तेज बारिश से तापमान में बड़ी गिरावट आई है। इस बदलाव से जहां किसानों और पर्यटन कारोबारियों के चेहरे खिले हैं, वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में यातायात और जनजीवन से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ गई हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
जनवरी के अंतिम सप्ताह में हुई यह बर्फबारी इस सीजन की पहली व्यापक हिमपात मानी जा रही है। लंबे समय तक शुष्क मौसम रहने से पहाड़ी क्षेत्रों में सूखापन बढ़ गया था और जंगलों में आग की घटनाएं भी सामने आ रही थीं। ऐसे में यह बारिश और बर्फबारी पर्यावरण और कृषि दोनों के लिए अहम मानी जा रही है।
ऊंचाई वाले इलाकों में भारी हिमपात
सीजन की पहली व्यापक बर्फबारी से केदारनाथ धाम में करीब एक फीट तक बर्फ जम गई है। बदरीनाथ, गंगोत्री-यमुनोत्री, औली, हेमकुंड साहिब, तुंगनाथ, मध्यमेश्वर, त्रियुगीनारायण और मलारी-नीती घाटी में लगातार हिमपात हुआ। मसूरी, धनौल्टी, चकराता, हर्षिल, चोपता, लैंसडौन, मुनस्यारी, काणाताल, सुरकंडा देवी, नागटिब्बा, लाल टिब्बा और जॉर्ज एवरेस्ट जैसे पर्यटन स्थल आधे से एक फीट तक बर्फ की सफेद चादर से ढक गए।
मसूरी में माल रोड से किंग क्रेग तक बर्फ जमने से नजारा पूरी तरह बदल गया और पर्यटकों की संख्या में इजाफा देखा गया।
कुमाऊं और गढ़वाल में मौसम का असर
पिथौरागढ़ जिले में आदि कैलास, ओम पर्वत, गुंजी, नाबी और मुनस्यारी क्षेत्र में अच्छी बर्फबारी हुई। अल्मोड़ा जनपद की सबसे ऊंची भरतकोट चोटी, द्रोणागिरि पर्वतमाला, रानीखेत के चौबटिया और स्याहीदेवी की चोटियों पर भी हिमपात दर्ज किया गया। बिनसर, जागेश्वर धाम और वृद्ध जागेश्वर में बर्फ गिरने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों में खासा उत्साह देखा गया।
बागेश्वर जिले के खाती, विनायक, धुर, वाछम और आसपास के ऊंचाई वाले गांवों में भी बर्फबारी हुई। नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर, रामगढ़, सूपी और धानाचूली क्षेत्र में भारी हिमपात के बीच पर्यटकों ने बर्फबारी का आनंद लिया।
मौसम विभाग की वजह और चेतावनी
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक चंद्र सिंह तोमर के अनुसार, एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के हिमालयी क्षेत्र से टकराने के कारण पूरे प्रदेश में वर्षा और बर्फबारी हुई है। शनिवार को पिथौरागढ़, बागेश्वर, उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में वर्षा-बर्फबारी को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।
इसके साथ ही डीजीआरई चंडीगढ़ ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमस्खलन की चेतावनी जारी की है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून और एनडीएमए के सचेत पोर्टल की ओर से देहरादून में कहीं-कहीं भारी वर्षा, गर्जन के साथ आकाशीय बिजली और मध्यम बर्फबारी को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
तापमान में गिरावट से बढ़ी ठंड
देहरादून में पूरे दिन हुई वर्षा के कारण अधिकतम तापमान में करीब 12 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। मसूरी का तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में कड़ाके की ठंड का असर महसूस किया जा रहा है।
स्कूलों में अवकाश और जनजीवन पर असर
भारी वर्षा-बर्फबारी के अलर्ट के चलते प्रदेश के 12 जिलों में कक्षा एक से 12 तक के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है। इनमें देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पौड़ी, टिहरी, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर शामिल हैं।
यातायात बाधित, कई मार्ग बंद
बर्फबारी के चलते गंगोत्री हाईवे पर गंगनानी से आगे और यमुनोत्री मार्ग पर राड़ी टॉप के आगे वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। औली मोटर मार्ग और बदरीनाथ हाईवे भी बंद हो गया है। चकराता-मसूरी-त्यूणी राष्ट्रीय राजमार्ग सहित कई अन्य मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ है। गैरसैंण क्षेत्र में एक बारात भी बर्फबारी के कारण फंस गई, जिसे पैदल यात्रा करनी पड़ी।
खेती, बागवानी और पर्यटन को राहत
वर्षा और बर्फबारी को खेती और बागवानी के लिए संजीवनी माना जा रहा है। इससे सेब के बागानों को आवश्यक शीतमान मिलेगा और गेहूं व मटर की फसलों में नमी लौटने की उम्मीद है। पर्यटन व्यवसायियों के अनुसार बर्फबारी के बाद पर्यटक स्थलों पर भीड़ बढ़ने की संभावना है, जिससे कारोबार को गति मिलेगी।
जंगल की आग पर लगा ब्रेक
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क क्षेत्र में वर्षा और बर्फबारी से जंगलों में लगी आग पूरी तरह बुझ गई है। तपोवन और हेलंग-उर्गम की पहाड़ियों में बीते दिनों से जल रही आग पर भी काबू पा लिया गया है, जिसे पर्यावरण के लिए राहत भरी खबर माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में ठंड का असर बना रह सकता है। प्रशासन को हिमस्खलन और सड़क बंद होने की आशंका को देखते हुए सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। यात्रियों और पर्यटकों से सावधानी बरतने की अपील की गई है।







