
देहरादून: आर्केडिया हिलॉक्स परियोजना से जुड़े फ्लैट खरीदारों को बड़ी राहत देते हुए उत्तराखंड रेरा ने नौ फ्लैटों की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी है। इन फ्लैटों के लिए खरीदारों से पूरी रकम वसूल ली गई थी, लेकिन अब तक उनके पक्ष में रजिस्ट्री नहीं की गई थी। खरीदारों ने आशंका जताई थी कि परियोजना से जुड़े एक प्रमोटर की अनुपस्थिति में फ्लैट किसी तीसरे पक्ष को बेचे जा सकते हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए रेरा ने अग्रिम आदेशों तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश जारी किए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
रियल एस्टेट क्षेत्र में बिना रजिस्ट्री के फ्लैट बिक्री और देरी से कब्जा जैसे मामले लंबे समय से विवाद का कारण रहे हैं। रेरा अधिनियम का उद्देश्य ऐसे मामलों में खरीदारों के हितों की रक्षा करना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
खरीदारों की शिकायत
हिलॉक्स परियोजना में फ्लैट खरीदने वाले कुल 10 खरीदारों ने रेरा में शिकायत दर्ज कराई थी। इनमें राजेंद्र सिंह नकोटी, चैतन्य बहुगुणा, कुंवर पाल सिंह, विजया देवी कोडिया, अनिल राणा, अमित राणा, रणबीर पुरी, मणि महेश एग्रोटेक और आशिमा अग्रवाल शामिल हैं। सभी शिकायतों का स्वरूप एक जैसा है, जिसमें कहा गया है कि फ्लैट की पूरी कीमत चुकाने के बावजूद अब तक रजिस्ट्री नहीं की गई।
रेरा का आदेश
रेरा सदस्य नरेश मठपाल की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए नौ फ्लैटों की खरीद-बिक्री पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगाने का निर्देश दिया है। साथ ही जिला निबंधक और सभी उप निबंधकों को इन फ्लैटों की रजिस्ट्री संपादित न करने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
प्रमोटर्स बनाए गए पक्षकार
रेरा ने इस मामले में मैसर्स गोल्डन ऐरा इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और इसके प्रमोटर्स अतुल गर्ग, प्रतीक गर्ग, निदेशक अंजलि गर्ग, निदेशक शाश्वत गर्ग समेत अन्य को पार्टी बनाया है। खरीदारों ने आशंका जताई थी कि शेष साझेदार फ्लैट किसी अन्य व्यक्ति के नाम भी ट्रांसफर कर सकते हैं।
अतिरिक्त आर्थिक बोझ की आशंका
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रमोटर शाश्वत गर्ग के देश से बाहर चले जाने के बाद इलाके में सर्किल रेट बढ़ चुके हैं। यदि अब रजिस्ट्री होती है तो स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्क के रूप में उन्हें अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा, जो अनुचित होगा।
कानूनी उल्लंघन की बात
खरीदारों ने दलील दी कि यदि फ्लैट किसी तीसरे पक्ष को बेचे जाते हैं तो यह रेरा अधिनियम की धारा 11, 14 और 17 का सीधा उल्लंघन होगा। इसी आधार पर रेरा ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।
आगे क्या होगा
रेरा में मामले की आगे सुनवाई होगी। अंतिम आदेश आने तक फ्लैटों की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर रोक जारी रहेगी। खरीदारों को उम्मीद है कि इससे उनके हित सुरक्षित रहेंगे।





