
देहरादून: मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट में एंट्री फीस को लेकर हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश आने के बावजूद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार हो रहे हंगामे को देखते हुए पर्यटन विभाग ने कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखा है। इसके साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सख्ती बरतने को लेकर देहरादून एसएसपी को भी पत्र भेजा गया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पर्यटन विभाग की ओर से मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र को रीडेवलप कर पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जॉर्ज एवरेस्ट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत परिसर में म्यूजियम सहित अन्य सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसी को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध हुआ और मामला कोर्ट तक पहुंचा।
कोर्ट का स्पष्ट आदेश
पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि पब्लिक रोड पर किसी भी प्रकार का टोल या एंट्री फीस नहीं ली जाएगी। हालांकि, जॉर्ज एवरेस्ट परिसर के भीतर स्थित म्यूजियम और अन्य विकसित पर्यटन स्थलों में प्रवेश के लिए एंट्री फीस ली जा सकती है। कोर्ट के आदेश के बिंदु संख्या 10 में यह भी स्पष्ट किया गया है कि म्यूजियम की ओर जाने वाले पर्यटकों से शुल्क वसूलना वैध है, ताकि प्रोजेक्ट के लिए राजस्व अर्जित किया जा सके।
पर्यटन विभाग की सख्ती
कोर्ट के आदेशों के बावजूद कुछ लोगों द्वारा लगातार विरोध, अराजकता और जबरदस्ती की जा रही है। इस पर पर्यटन सचिव ने कहा कि विभाग ने मजिस्ट्रेट को पत्र लिखकर कोर्ट के आदेशों का पालन सख्ती से कराने का अनुरोध किया है। साथ ही देहरादून एसएसपी को भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिखा गया है।
आदेश न मानने पर कार्रवाई के संकेत
पर्यटन सचिव ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग की मंशा है कि जॉर्ज एवरेस्ट जैसी महत्वाकांक्षी पर्यटन योजना बिना किसी व्यवधान के संचालित हो, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ राज्य सरकार के राजस्व में भी वृद्धि हो।
आगे क्या
प्रशासनिक स्तर पर अब पूरे मामले की निगरानी की जा रही है। आने वाले दिनों में जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र में स्थिति सामान्य बनाने और कोर्ट के आदेशों को धरातल पर लागू कराने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं।







