
देहरादून में साल 2025 के आखिरी दिन उत्तराखंड की राजनीति को लेकर अहम चर्चाएं सामने आ रही हैं। जैसे-जैसे नया साल 2026 नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे यह साफ होता जा रहा है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी 2025 से ही शुरू कर दी है। संगठनात्मक बदलाव, नई जिम्मेदारियां और चुनावी समितियों का गठन इस बात का संकेत है कि प्रदेश की राजनीति अब सीधे अगले चुनावी मुकाबले की ओर बढ़ रही है। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनका असर आने वाले दो वर्षों की राजनीतिक दिशा और समीकरणों पर पड़ने वाला है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राजनीतिक जानकारों के अनुसार किसी भी विधानसभा चुनाव से करीब डेढ़ से दो साल पहले पार्टियां पूरी तरह सक्रिय हो जाती हैं। उत्तराखंड में भी यही स्थिति दिखाई दे रही है। साल 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस और बीजेपी ने 2025 में ही संगठन स्तर पर बड़े बदलाव किए हैं। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर जिला और मंडल स्तर तक नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत किया जा सके।
आधिकारिक जानकारी
बीजेपी ने जहां प्रदेश अध्यक्ष पद पर महेंद्र भट्ट को दोबारा जिम्मेदारी सौंपी है, वहीं संगठन के अन्य पदों और मंडल स्तर पर व्यापक फेरबदल किया गया है।
दूसरी ओर कांग्रेस ने न केवल प्रदेश अध्यक्ष बदला, बल्कि चुनाव अभियान समिति और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भी नामित कर दिए हैं। कांग्रेस का यह कदम यह दर्शाता है कि पार्टी आगामी चुनाव को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
राजनीति पर नजर रखने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय बाद दोनों प्रमुख दल एक साथ इतने पहले चुनावी मोड में नजर आ रहे हैं।
कुछ लोगों का मानना है कि संगठनात्मक बदलावों का सीधा असर 2026 में दिखना शुरू हो जाएगा, जब राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी।
विशेषज्ञों की राय
वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत का कहना है कि इस बार कांग्रेस और बीजेपी ने सामान्य समय से पहले चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। उनके अनुसार, कांग्रेस ने बड़े पैमाने पर संगठन में बदलाव कर यह संकेत दिया है कि वह 2027 के चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है।
वहीं बीजेपी नेता और विधायक विनोद चमोली का दावा है कि संगठनात्मक दृष्टि से बीजेपी फिलहाल कांग्रेस से काफी आगे है और पार्टी तीसरी बार भी सरकार बनाने की दिशा में काम कर रही है।
संख्यात्मक विवरण
बीजेपी लगातार दो विधानसभा चुनाव जीत चुकी है—2017 और 2022 में। उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार हुआ था जब किसी पार्टी ने लगातार दो बार सत्ता हासिल की। वहीं कांग्रेस पिछले दो टर्म से सत्ता से बाहर है और 2027 का चुनाव पार्टी के लिए साख का सवाल माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
साल 2026 को चुनावी वर्ष माना जा रहा है, ऐसे में दोनों दलों की गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। संगठनात्मक मजबूती, जमीनी स्तर पर सक्रियता और नेतृत्व को लेकर आने वाले महीनों में राजनीतिक बयानबाजी और रणनीतियां और स्पष्ट होंगी।





