
धर्म डेस्क: वसंत पंचमी में क्यों पहनते हैं पीले वस्त्र और चढ़ाते हैं पीले भोग, यह प्रश्न हर साल माघ महीने में लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से आता है। ऋषिकेश सहित पूरे उत्तर भारत में वसंत पंचमी का पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन, सकारात्मक ऊर्जा और ज्ञान की साधना से जुड़ा एक विशेष दिन माना जाता है। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व है, जिसे लेकर धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी जुड़े हुए हैं।
वर्तमान समय में भी ऋषिकेश के मंदिरों, आश्रमों और घरों में वसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनने और पीले भोग अर्पित करने की परंपरा पूरी श्रद्धा से निभाई जाती है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही प्रासंगिक मानी जाती है।
वसंत पंचमी और पीले रंग का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में वसंत पंचमी को मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। मां सरस्वती को विद्या, बुद्धि, संगीत और ज्ञान की देवी माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पीला रंग ज्ञान, ऊर्जा और सात्विकता का प्रतीक है, इसलिए इस दिन पीले वस्त्र धारण कर मां सरस्वती की पूजा की जाती है।
पीले रंग को बृहस्पति ग्रह से भी जोड़ा जाता है, जो ज्ञान और विवेक का कारक ग्रह माना जाता है। मान्यता है कि वसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनने और पीले भोग चढ़ाने से विद्या, स्मरण शक्ति और सकारात्मक सोच में वृद्धि होती है।
पीले भोग चढ़ाने की परंपरा क्यों है
वसंत पंचमी पर केसर युक्त खीर, पीले चावल, बूंदी, बेसन के लड्डू और हलवा जैसे पीले भोग अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक दृष्टि से पीला भोग समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना गया है।
स्थानीय पंडितों के अनुसार, पीले भोग में प्रयोग होने वाली सामग्री जैसे हल्दी, केसर और बेसन शरीर के लिए भी लाभकारी मानी जाती हैं। इसलिए यह परंपरा केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से भी जुड़ी हुई है।
वसंत पंचमी में पीले रंग का वैज्ञानिक कारण
धार्मिक कारणों के साथ-साथ वसंत पंचमी में क्यों पहनते हैं पीले वस्त्र और चढ़ाते हैं पीले भोग, इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क भी मौजूद हैं। वसंत ऋतु के आगमन के साथ सरसों के खेत, फूल और पेड़-पौधे पीले रंग से भर जाते हैं। यह रंग आंखों को सुकून देता है और मानसिक तनाव को कम करने में सहायक माना जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से पीला रंग मन में उत्साह, ऊर्जा और सकारात्मकता को बढ़ाता है। यही कारण है कि ऋतु परिवर्तन के इस समय पीले रंग को अपनाने की परंपरा विकसित हुई।
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धार्मिक और वैज्ञानिक कारणों का तुलनात्मक विवरण
| विषय | धार्मिक कारण | वैज्ञानिक कारण |
|---|---|---|
| पीले वस्त्र | ज्ञान, सात्विकता और मां सरस्वती की कृपा का प्रतीक | पीला रंग मानसिक प्रसन्नता, ऊर्जा और सकारात्मक सोच को बढ़ाता है |
| पीला भोग | शुभता, समृद्धि और देवी को प्रिय माना गया | हल्दी, केसर और बेसन जैसे तत्व पाचन व स्वास्थ्य के लिए लाभकारी |
| वसंत ऋतु | देवी सरस्वती के प्राकट्य और शुभ आरंभ का समय | प्रकृति में नवजीवन, फूलों का खिलना और मौसम का संतुलन |
ऋषिकेश में वसंत पंचमी का स्थानीय महत्व
ऋषिकेश में वसंत पंचमी के दिन कई आश्रमों और विद्यालयों में विशेष पूजा, विद्यारंभ संस्कार और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। वर्तमान समय में भी माता-पिता इस दिन बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत कराना शुभ मानते हैं। स्थानीय मान्यता है कि इस दिन लिया गया ज्ञान लंबे समय तक स्थिर रहता है।
कुल मिलाकर, वसंत पंचमी में क्यों पहनते हैं पीले वस्त्र और चढ़ाते हैं पीले भोग, इसका उत्तर धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक सोच दोनों में छिपा है। यह परंपरा ज्ञान, स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवन दृष्टि को अपनाने का संदेश देती है। वसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा और आशा भरने का अवसर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
वसंत पंचमी पर पीले रंग को ही क्यों महत्व दिया जाता है?
वसंत पंचमी का पर्व वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है। इस समय प्रकृति में सरसों और फूलों का पीला रंग दिखाई देता है। धार्मिक रूप से यह रंग ज्ञान और शुभता का प्रतीक है, वहीं वैज्ञानिक रूप से यह मन को प्रसन्न और ऊर्जावान बनाता है।
क्या वसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनना अनिवार्य होता है?
पीले वस्त्र पहनना अनिवार्य नहीं है, लेकिन इसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि पीले वस्त्र पहनने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पूजा का प्रभाव अधिक माना जाता है।
वसंत पंचमी पर पीला भोग क्यों चढ़ाया जाता है?
पीला भोग जैसे खीर, हलवा या बूंदी देवी सरस्वती को प्रिय माना जाता है। साथ ही इनमें उपयोग होने वाली सामग्री शरीर के लिए भी लाभकारी होती है, इसलिए यह परंपरा चली आ रही है।
क्या वसंत पंचमी का संबंध केवल पूजा से ही है?
नहीं, वसंत पंचमी केवल पूजा तक सीमित नहीं है। यह पर्व ऋतु परिवर्तन, नए आरंभ और ज्ञान के विकास से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे सांस्कृतिक और प्राकृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
बच्चों के लिए वसंत पंचमी क्यों विशेष मानी जाती है?
इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है, इसलिए बच्चों की पढ़ाई शुरू करना या विद्यारंभ संस्कार करना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इससे बच्चों में सीखने की रुचि और स्मरण शक्ति बढ़ती है।
क्या वसंत पंचमी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है?
हां, आज भी वसंत पंचमी का महत्व बना हुआ है। बदलती जीवनशैली के बावजूद यह पर्व हमें प्रकृति, ज्ञान और सकारात्मक सोच से जुड़ने की याद दिलाता है।






