
देहरादून। उत्तराखंड में जल संरक्षण और नदियों के पुनर्जीवन को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य का जलागम विभाग अब “वन डिस्ट्रिक्ट, वन रिवर” (One District, One River) के सिद्धांत पर कार्य करेगा। इस मॉडल के ज़रिए प्रत्येक जिले में एक प्रमुख नदी के संरक्षण और उसके जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर फोकस किया जाएगा।
राज्य के जलागम सचिव एवं स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी के सीईओ दिलीप जावलकर की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की चौथी बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक के दौरान जल संरक्षण से संबंधित 382.26 लाख रुपये की तीन प्रमुख योजनाओं को मंजूरी दी गई।
इन परियोजनाओं में —
- नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में भू-गर्भीय जलभृत रिचार्ज हेतु 207.56 लाख रुपये,
- तथा चमोली जिले की चंद्रभागा नदी के पुनर्जीवन के लिए 174.70 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई।
जल संरक्षण और स्थानीय भागीदारी पर विशेष ज़ोर
सचिव जावलकर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी जिलों में जल स्रोतों और नदियों के संरक्षण से जुड़े कार्यों को शीर्ष प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि राज्य की रजत जयंती समारोहों के अंतर्गत जल संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों का डाक्यूमेंटेशन कर जल्द शासन को भेजा जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय बनाकर कार्य करें, ताकि नदियों का सतत पुनर्जीवन सुनिश्चित हो सके।
स्थानीय पैराहाइड्रोलॉजिस्ट तैयार होंगे
बैठक में यह भी तय किया गया कि जलागम क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर पैराहाइड्रोलॉजिस्टों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे जल प्रबंधन के कार्य वैज्ञानिक तरीके से और स्थानीय ज्ञान के साथ हो सकें।
साथ ही, स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी से जुड़ी जिला समितियों की नियमित बैठकें आयोजित करने और कार्यदायी विभागों की तकनीकी टीमों को विशेष प्रशिक्षण देने के भी निर्देश दिए गए।
राज्य की धरोहर धारों और नौलों का पुनर्जीवन
सचिव ने राज्य की पारंपरिक धारों और नौलों के संरक्षण को तत्काल चिन्हित कर पुनर्जीवीकरण की प्रक्रिया शुरू करने को कहा। अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी कहकशां नसीम ने कहा कि सभी रेखीय विभाग मिलकर एक ही जलागम क्षेत्र पर समन्वित रूप से काम करें, ताकि उसका सतत पुनर्जीवन (Sustainable Rejuvenation) सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्य उद्देश्य
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि जल संरक्षण, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन और नदी संरक्षण को स्थानीय समुदाय की भागीदारी से एक जन आंदोलन का रूप दिया जाए।







