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उत्तरकाशी: वन अधिनियम की अड़चनों के चलते क्वाड़ी गांव की पेयजल योजना बीते दो वर्षों से अधर में लटकी हुई है। जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत इस योजना के पाइप सड़क किनारे पड़े-पड़े जंग खा रहे हैं, जिससे उनके चोरी होने का भी खतरा बढ़ गया है। करीब 40.25 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत इस योजना से क्वाड़ी और कुंड गांव की लगभग एक हजार आबादी को लाभ मिलना था, लेकिन वन विभाग से अनुमति न मिलने के कारण पाइप बिछाने का काम शुरू नहीं हो पाया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
क्वाड़ी गांव लंबे समय से पेयजल किल्लत की समस्या से जूझ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए जल जीवन मिशन के तहत एक महत्वाकांक्षी पेयजल योजना स्वीकृत की गई थी। योजना के तहत स्यालडी जल स्रोत से गांव तक पाइपलाइन बिछाई जानी थी, ताकि ग्रामीणों को नियमित और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके।
योजना की स्थिति
यह पेयजल योजना क्वाड़ी गांव से लगभग छह से सात किलोमीटर दूर स्यालडी जल स्रोत से लाई जानी थी। योजना के अंतर्गत बनने वाला वाटर सप्लाई टैंक तैयार हो चुका है, लेकिन मुख्य समस्या पाइपलाइन बिछाने को लेकर सामने आई। पाइप बिछाने के लिए वन क्षेत्र से होकर मार्ग प्रस्तावित था, जिसके लिए वन विभाग की अनुमति आवश्यक थी, जो अब तक नहीं मिल सकी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
क्वाड़ी गांव के पूर्व प्रधान शांतिलाल का कहना है कि योजना स्वीकृत होने के बाद ग्रामीणों को लगा था कि वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का समाधान होगा, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने बताया कि गर्मियों के मौसम में ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं को पानी के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
आधिकारिक जानकारी
उप प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग के अनुसार क्वाड़ी पेयजल योजना पर भारत सरकार की नोडल एजेंसी की ओर से आपत्ति लगाई गई थी, जिसके कारण योजना के प्रस्ताव में बदलाव आवश्यक हो गया। कार्यदायी संस्था को इस बारे में पहले ही अवगत कराया गया था। अब संबंधित प्रस्ताव को नोडल एजेंसी द्वारा डीलिस्ट कर दिया गया है, जिसके चलते पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ेगी।
आंकड़े / तथ्य
यह योजना लगभग 40.25 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत हुई थी।
क्वाड़ी और कुंड गांव की करीब एक हजार आबादी को इससे लाभ मिलना था।
क्वाड़ी गांव के लगभग सौ परिवार सीधे तौर पर इस योजना पर निर्भर हैं।
पूरे जिले में वन अधिनियम से जुड़ी करीब 52 योजनाएं लंबित बताई जा रही हैं।
आगे क्या होगा
पेयजल निर्माण निगम के अनुसार जिले में वन अधिनियम से जुड़ी लंबित योजनाओं का चरणबद्ध तरीके से निस्तारण किया जा रहा है। क्वाड़ी पेयजल योजना के लिए भी आवश्यक प्रक्रियाएं दोबारा शुरू की जाएंगी, ताकि वन विभाग की अनुमति मिलने के बाद पाइपलाइन बिछाने का काम आगे बढ़ सके।




