
देहरादून: मध्य हिमालयी राज्य उत्तराखंड की ठंडी और शुद्ध जलधाराओं में पलने वाली ट्राउट मछली अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार है। राज्य से संयुक्त अरब अमीरात को ट्राउट मछली के निर्यात की दिशा में मत्स्यपालन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके लिए खाद्य सुरक्षा समेत अन्य जरूरी प्रमाणपत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार की इस पहल से जहां मत्स्य पालकों को बेहतर बाजार और दाम मिलने की उम्मीद है, वहीं राज्य में ट्राउट पालन को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
राज्य सरकार मत्स्य पालन को रोजगार के प्रमुख साधनों में शामिल करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में ट्राउट मछली उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और उत्तरकाशी जिलों के साथ ही देहरादून के पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित रेसवेज में ट्राउट का उत्पादन किया जा रहा है। इसके अलावा चंपावत और नैनीताल समेत अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में भी इसकी शुरुआत की जा रही है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
मत्स्य पालन विभाग के अनुसार प्रथम चरण में 20 टन ट्राउट मछली के निर्यात की योजना बनाई गई है, जिसे आगे चलकर बढ़ाया जाएगा। विभाग का कहना है कि निर्यात के लिए आवश्यक फूड सेफ्टी और अन्य प्रमाणपत्र जल्द से जल्द प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि यूएई को ट्राउट की पहली खेप भेजी जा सके।
स्थानीय प्रतिक्रिया
मत्स्य पालकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलने से उन्हें उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ेगी, बल्कि युवा भी ट्राउट पालन की ओर आकर्षित होंगे। शुद्ध और ठंडे पानी में पली होने के कारण उत्तराखंड की ट्राउट को स्वाद और गुणवत्ता के लिहाज से खास माना जाता है।
आंकड़े और तथ्य
वर्तमान में राज्य में 1625 रेसवेज में लगभग 710 मीट्रिक टन ट्राउट मछली का उत्पादन हो रहा है। हाल ही में दुबई में आयोजित गल्फूड प्रदर्शनी में उत्तराखंड में उत्पादित ट्राउट मछली का प्रदर्शन किया गया, जहां इसे खासा पसंद किया गया। इसके बाद यूएई के कई वितरकों ने विभागीय अधिकारियों से संपर्क कर आपूर्ति सुनिश्चित कराने में रुचि दिखाई।
आगे क्या होगा
मत्स्यपालन विभाग ट्राउट के विपणन पर भी फोकस कर रहा है। अभी तक विभिन्न समितियों के माध्यम से आईटीबीपी को लगभग 32 टन ट्राउट मछली की आपूर्ति की जा चुकी है। अब एसएसबी और सेना के साथ भी करार की तैयारी है। इसके अलावा सितारा होटलों को भी ट्राउट उपलब्ध कराई जा रही है।
प्रमाणपत्र मिलने के बाद यूएई के साथ-साथ भविष्य में अन्य देशों को भी ट्राउट मछली के निर्यात की योजना है।
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