
देहरादून: उत्तराखंड में अब यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों को जुर्माने के साथ सामाजिक सेवा भी करनी पड़ सकती है। परिवहन विभाग ने एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है, जिसमें नियम तोड़ने वालों को यातायात संचालन, स्वच्छता कार्य, वृक्षारोपण, रक्तदान या हेलमेट वितरण जैसी सामाजिक सेवाओं को करने का विकल्प दिया गया है। विभाग का मानना है कि इससे लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और यातायात नियमों के महत्व का बोध भी होगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते ग्राफ और यातायात नियमों के उल्लंघन के मामलों ने सरकार और परिवहन विभाग को नई व्यवस्था पर विचार करने के लिए मजबूर किया है। तेज गति, नशे में वाहन चलाना, हेलमेट न पहनना, ओवरलोडिंग, फोन पर बात करते हुए ड्राइविंग और रेड लाइट जंप करने जैसी लापरवाहियां हर वर्ष बड़ी संख्या में दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। मौजूदा जुर्माने और कानूनी प्रावधानों के बावजूद सुधार की गति धीमी है।
इसी पृष्ठभूमि में परिवहन विभाग ने मोटर यान अधिनियम की धारा 200 के प्रावधानों के आधार पर सामुदायिक सेवा को दंड के रूप में शामिल करने का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है।
आधिकारिक जानकारी
प्रस्ताव के अनुसार, जो व्यक्ति यातायात नियम तोड़ेगा, उसे आर्थिक दंड के साथ एक सामाजिक सेवा का विकल्प चुनना होगा। प्रस्तावित सामाजिक सेवाओं में यातायात संचालन में सहयोग, सार्वजनिक स्थलों पर सफाई, वृक्षारोपण, हेलमेट वितरण, रिफ्लेक्टिव टेप लगाना और जरूरतमंदों के लिए भोजन की व्यवस्था जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं।
विभाग का मानना है कि सामुदायिक सेवा जैसे दंड से नियम तोड़ने वालों में जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी, क्योंकि उन्हें समाज के प्रति किए गए नुकसान की भरपाई सामाजिक कार्यों के माध्यम से करनी होगी। प्रस्ताव में यह भी उल्लेख है कि यदि कोई व्यक्ति सामुदायिक सेवा नहीं करना चाहता, तो उससे दोगुना आर्थिक दंड वसूला जा सकता है।
तीन श्रेणियों के तहत अलग-अलग प्रकार के उल्लंघनों पर अलग अवधि की सामाजिक सेवाओं का प्रावधान किया गया है। गंभीर उल्लंघन करने वालों के लिए यह समय अवधि कई गुना बढ़ाई जा सकती है। बार-बार नियम तोड़ने वालों पर तीर्थयात्रियों के लिए लंगर लगाने, रक्तदान करने या सामाजिक संस्थाओं में सेवा देने जैसी शर्तें लागू होंगी।
अपर परिवहन आयुक्त एसके सिंह के अनुसार, मुख्यालय स्तर से यह प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है और अब निर्णय होना शेष है। विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था से प्रदेश में सड़क सुरक्षा और यातायात अनुशासन में सकारात्मक सुधार देखने की उम्मीद है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय नागरिकों और यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि केवल जुर्माना बढ़ाने से व्यवहार में बदलाव नहीं आता, लेकिन सामुदायिक सेवा जैसे दंड लोगों में जिम्मेदारी का एहसास दिलाएंगे। कुछ लोगों का मानना है कि यदि नियम तोड़ने वाले खुद सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्य करेंगे, तो वे भविष्य में उल्लंघन करने से बचेंगे।
युवा वाहन चालकों ने भी इसे एक उपयोगी पहल बताया। उनका कहना है कि जागरूकता और अनुशासन तभी आएगा जब लोग समझेंगे कि उनकी लापरवाही समाज और खुद उनके लिए कितनी हानिकारक है। वहीं कुछ लोग यह भी मानते हैं कि प्रस्ताव तभी प्रभावी होगा जब इसे सख़्ती और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाए।
आगे क्या?
शासन स्तर पर प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। स्वीकृति मिलने के बाद इसके नियम, श्रेणियाँ और क्रियान्वयन की प्रक्रिया तैयार होगी। परिवहन विभाग का लक्ष्य है कि सड़क सुरक्षा में सुधार हो और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों की संख्या कम हो।
प्रदेश भर में इससे जुड़ी जागरूकता मुहिम भी शुरू की जा सकती है ताकि लोग पहले ही समझ सकें कि ट्रैफिक नियम तोड़ने पर दंड सिर्फ जुर्माना ही नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा भी होगी।







