
देहरादून: उत्तराखंड में शिक्षकों से जुड़ी एक अहम पहल शिक्षा विभाग की ओर से सामने आई है। नए शैक्षिक सत्र से शिक्षकों को 10 उपार्जित अवकाश (ईएल) देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के तहत तैयार की जा रही राज्य पाठ्यचर्या के अनुरूप स्कूलों की कार्य अवधि और अवकाश व्यवस्था को संतुलित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार गर्मी और सर्दी की छुट्टियों में कटौती कर शैक्षणिक दिनों की संख्या बढ़ाई जाएगी, ताकि पढ़ाई और सह-पाठ्य गतिविधियों के लिए तय समयसीमा पूरी हो सके।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
एनईपी–2020 के मानकों के अनुसार स्कूलों में न्यूनतम 240 कार्यदिवस सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। मौजूदा व्यवस्था में ग्रीष्म और शीतकालीन अवकाश अपेक्षाकृत अधिक होने के कारण यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। इसी वजह से राज्य पाठ्यचर्या के तहत अवकाश प्रणाली में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
आधिकारिक जानकारी
शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया कि नए फार्मूले में गर्मी और सर्दी—दोनों अवकाशों की अवधि घटाई जाएगी। निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण वंदना गबर्याल ने पुष्टि की है कि एनईपी–2020 के अनुरूप स्कूल अवधि तय करना आवश्यक है और इसी संतुलन के लिए शिक्षकों को कम से कम 10 ईएल देने की योजना है।
छुट्टियों में प्रस्तावित बदलाव
वर्तमान में ग्रीष्म और शीतकालीन अवकाश मिलाकर करीब 48 दिन होते हैं। नए प्रस्ताव के अनुसार इन अवकाशों में 16 दिन की कटौती की जाएगी। इसके बाद गर्मी का अवकाश 16 दिन और सर्दी का अवकाश भी 16 दिन रखा जा सकता है। कटौती किए गए दिनों की भरपाई शिक्षकों को ईएल देकर की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
शिक्षकों का कहना है कि यदि अवकाश में कटौती के साथ ईएल की सुविधा दी जाती है, तो कार्य–जीवन संतुलन बेहतर रहेगा। वहीं अभिभावकों का मानना है कि स्कूल खुलने के दिनों की संख्या बढ़ने से बच्चों की पढ़ाई की निरंतरता बनी रहेगी।
आगे क्या होगा
शिक्षा विभाग के स्तर पर प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है। नए शैक्षिक सत्र से पहले टाइम-टेबल और अवकाश कैलेंडर में आवश्यक संशोधन किए जा सकते हैं। अंतिम निर्णय के बाद सभी विद्यालयों को दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।







