
देहरादून: उत्तराखंड में राज्य स्थापना दिवस इस बार एक भव्य आयोजन के रूप में मनाया जाएगा। वर्ष 2025 प्रदेश के लिए खास है, क्योंकि उत्तराखंड राज्य गठन को 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं — यानी यह रजत जयंती वर्ष है। इस अवसर पर सरकार बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी में है। वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित दौरे को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है।
रजत जयंती पर विशेष सत्र और वीवीआईपी मूवमेंट
राज्य स्थापना दिवस से पहले प्रदेश सरकार ने 3 और 4 नवंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने बताया कि इस विशेष सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी की संभावना है। माना जा रहा है कि यह सत्र राज्य के गठन और विकास से जुड़े कुछ बड़े निर्णयों का साक्षी बन सकता है।
वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप राणा का कहना है कि राष्ट्रपति की उपस्थिति संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण संकेत देती है। “यदि राज्य स्थापना से जुड़े किसी निर्णय पर विचार होना है, तो राष्ट्रपति की मौजूदगी एक अहम संकेत है,” उन्होंने कहा।
राजनीतिक दृष्टि से अहम मौका
यह आयोजन सिर्फ जश्न तक सीमित नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राज्य स्थापना दिवस के अवसर को बीजेपी आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए रणनीतिक रूप से भुनाने की तैयारी कर रही है। पार्टी इस मौके पर जनता को कुछ बड़ी घोषणाओं या योजनाओं की सौगात दे सकती है।
बीजेपी प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने कहा कि संगठन स्तर पर भी रजत जयंती वर्ष को लेकर विशेष कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। “सरकार राज्य स्थापना वर्ष पर जो बड़े निर्णय लेने जा रही है, पार्टी सुनिश्चित करेगी कि वह संदेश जन-जन तक पहुंचे,” उन्होंने बताया।
जनता की बढ़ी उम्मीदें
राज्य स्थापना के 25 वर्षों में उत्तराखंड ने कई क्षेत्रों में प्रगति की है, लेकिन जनता अब भी प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन, गैरसैंण की स्थिति और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर नई उम्मीदें रखती है। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप राणा ने कहा, “प्रदेश ने विकास की लंबी यात्रा तय की है, लेकिन कुछ मूलभूत मुद्दों पर अब भी निर्णायक फैसलों की जरूरत है।”
संभावनाओं से भरा रजत जयंती वर्ष
राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार रजत जयंती वर्ष को मील का पत्थर बनाने की तैयारी में है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार इस अवसर को 2027 चुनावों की दिशा तय करने वाले “टर्निंग पॉइंट” के रूप में इस्तेमाल कर सकती है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, 2014 के बाद बीजेपी का यह पैटर्न रहा है कि वह विशेष अवसरों पर बड़े निर्णय लेकर जनसमर्थन को मजबूत करती है। ऐसे में रजत जयंती वर्ष के दौरान भी सरकार किसी बड़े निर्णय की घोषणा कर सकती है, जिसका सीधा असर भविष्य की राजनीति पर देखने को मिल सकता है।







