
देहरादून: उत्तराखंड में प्रधानाचार्य सीमित विभागीय परीक्षा एक बार फिर स्थगित होने की कगार पर है। शिक्षा सचिव रविनाथ रामन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के कारण न्याय विभाग से परामर्श लिया जा रहा है। तब तक परीक्षा स्थगित रहेगी। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा 8 फरवरी 2026 के लिए घोषित परीक्षा तिथि भी अब अनिश्चित है। राजकीय शिक्षक संघ के विरोध और नियमावली में संशोधन की संभावना के बीच शिक्षा विभाग में बेसिक शिक्षकों की पदोन्नति भी रुकी हुई है।
परीक्षा स्थगन का कारण
- सुप्रीम कोर्ट का आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति के लिए टीईटी को अनिवार्य किया है। कई आवेदक शिक्षक टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं, जिससे प्रकरण सुप्रीम कोर्ट के दायरे में आ सकता है।
- न्याय विभाग से परामर्श: शिक्षा सचिव रविनाथ रामन ने बताया कि यह जांचा जा रहा है कि क्या यह मामला सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत आएगा। परामर्श पूरा होने तक परीक्षा स्थगित रहेगी।
- नियमावली में बदलाव: यदि नियमावली में संशोधन की जरूरत पड़ी, तो परीक्षा रद्द भी हो सकती है। इसके लिए शासन उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को पत्र लिखेगा।
शिक्षक संघ का विरोध और समिति गठन
- विरोध: राजकीय शिक्षक संघ ने परीक्षा का विरोध किया, क्योंकि इसमें सहायक अध्यापक (एलटी) को भी शामिल किया गया है।
- समिति गठन: सरकार ने सचिव कार्मिक शैलेश बगौली की अध्यक्षता में एक समिति बनाई, जो इस मामले की जांच कर रही है। अपर सचिव शिक्षा रंजना राजगुरु ने बताया कि समिति की दो बैठकें हो चुकी हैं, और जल्द रिपोर्ट दी जाएगी।
बेसिक शिक्षकों की पदोन्नति रुकी
- सुप्रीम कोर्ट का प्रभाव: सुप्रीम कोर्ट के टीईटी अनिवार्यता आदेश के कारण बेसिक शिक्षकों की पदोन्नति रुक गई है।
- पुनर्विचार याचिका: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का फैसला लिया है, लेकिन फिलहाल पदोन्नति प्रक्रिया ठप है।
- शिक्षा सचिव का बयान: रविनाथ रामन ने स्पष्ट किया कि प्रधानाचार्य परीक्षा पदोन्नति नहीं है, लेकिन सावधानी के तौर पर न्याय विभाग से परामर्श लिया जा रहा है।
खाली पदों की स्थिति
- प्रधानाचार्य: राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेजों में कुल 1,385 सृजित पदों में से 1,184 पद खाली हैं।
- प्रधानाध्यापक: कुल 910 सृजित पदों में से 822 पद खाली हैं।
- नियमावली संशोधन: शासन ने परीक्षा के लिए नियमावली में बदलाव किया था, लेकिन अब इसे फिर से जांचा जा रहा है।
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की स्थिति
- परीक्षा तिथि: आयोग ने 8 फरवरी 2026 को परीक्षा आयोजित करने की घोषणा की थी और आवेदन प्रक्रिया पूरी कर ली थी।
- अनिश्चितता: स्थगन के आदेश के बाद अब तिथि पर अनिश्चितता है।
सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव
- शिक्षकों में असंतोष: टीईटी अनिवार्यता और बार-बार स्थगन से शिक्षकों में निराशा बढ़ रही है।
- शिक्षा व्यवस्था पर असर: खाली पदों के कारण राजकीय स्कूलों में प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
- न्यायिक स्पष्टता की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट के आदेश और नियमावली के बीच स्पष्टता लाने की आवश्यकता है।







